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डोडा। रियासत के बाहर शिक्षा ग्रहण करने के दौरान डोडा क्षेत्र के कई छात्रों की मौत हो चुकी है। खासबात यह है कि इन आकस्मिक मौत के तथ्य सामने न आने से अन्य राज्यों की पुलिस द्वारा गंभीरता से तहकीकात न करने से उनकी मौत का कारण हमेशा राज बना रहा। अन्य राज्यों में पढ़ाई के दौरान मारे जाने वाले युवकों में पांच तो डोडा शहर के ही हैं। जिनमें 1996 में गुलाम नबी और यासिर गतु, 1998 में आमिर लतीफ रंगरेंज, 2012 में यूसुफ और छह दिन पहले मारे गए खालिद हुसैन मिनटू शामिल है। खालिद हुसैन डोडा का निवासी था और होशियारपुर पंजाब के एक कालेज में इंजीनियरिंग कर रहा था। 18 जनवरी शाम उसने अपने परिजनों के साथ बात की। जबकि 19 जनवरी को उसकी मौत की खबर उसके परिजनों तक पहुंची। घरवालों का कहना है कि जब हम वहां पहुंचे तो उसके एक साथी ने बताया कि इसकी मौत सुबह आठ बजे हुई, जबकि सुबह नौ बजे उनकी बेटे से बात हुई थी। एक अस्पताल में इलाज न किए जाने के बाद उसे दूसरे अस्पताल स्थानांतरित किया गया और इसी दौरान उसकी मौत हो गई। जिस कश्मीरी व्यक्ति के पास इसके मोबाइल पाए गए, उसका कहना था कि वह उसे जानता ही नहीं है। पंजाब में इसका पोस्टमार्टम भी किया गया है। परंतु पुलिस किस हद तक इसमें संजीदगी दिखाती है कि इसका पता आने वाले समय में चलेगा। लगातार छात्रों की मौत और उसका कारण पता न चलने से 24 जनवरी को प्रदर्शन करने की घोषणा कर दी है। खालिद के घरवालों का कहना है कि उनके बेटे को जहर दिया गया है और वो कालेज का टापर भी था। राज्य गृहमंत्री सज्जाद अहमद किचलू ने परिजनों से फोन पर बात करते हुए उन्हें आश्वासन दिया है कि वे सरकारी तौर पर पंजाब सरकार के समक्ष खालिद की हत्या का मामला उठाएंगे। आरएंडबी मंत्री अब्दुल मजीद वाणी ने सरकार से मांग की है कि डोडा के जितने भी छात्रों की हत्या बाहरी राज्यों में हुई है, उनकी सीबीआई जांच कराई जाए।
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