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काम रोको प्रस्ताव और जनरल के आरोप छाए रहे

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जम्मू। राज्य विधानसभा के जारी सत्र की अब तक की कार्यवाही स्थगन प्रस्तावों और पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह के आरोपों की जांच संबंधी मुद्दों तक ही सीमित रही। अब तक सदन की चार बैठकों में दो दिन ही प्रश्नकाल हुआ। इस दौरान विधानसभा में सिर्फ कश्मीर के मुद्दों को तरजीह मिलने पर विपक्ष में बैठे जम्मू संभाग के विधायकों ने अपनी नाराजगी भी स्पीकर मुबारक गुल से जताई।
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गत तीस सितंबर को पहले दिन विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही दिवंगत सदस्याें को श्रद्धांजलि देने के साथ निकल गई। इस दौरान विधानसभा में सत्ताधारी नेशनल कान्फ्रेंस ने जनरल वीके सिंह द्वारा राज्य के मंत्रियाें को सेना द्वारा रुपये देने के आरोपों पर विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किया। ऐसे ही प्रस्ताव पीडीपी की तरफ से पेश किया था। इन प्रस्तावाें को स्पीकर ने मंजूर करते हुए इस पर बहस कराने का भी ऐलान कर दिया। हालांकि अभी तक इस पर बहस नहीं हो सकी। इसके बाद पीडीपी ने शोपियां और किश्तवाड़, भाजपा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के विलय संबंधी बयान और किश्तवाड़ दंगा पीड़ितों की समस्याओं और पैंथर्स पार्टी ने भी किश्तवाड़ और आतंकी हमलों आदि मसलों पर काम रोको प्रस्ताव के नोटिस स्पीकर को भेज दिए लेकिन पीडीपी के प्रस्ताव को स्पीकर ने स्वीकार करते हुए पैंथर्स और भाजपा के काम रोको प्रस्ताव नामंजूर कर दिए। पीडीपी के प्रस्तावों पर हुई बहस का जवाब सीएम ने देते हुए शोपियां कांड की न्यायिक जांच का ऐलान भी किया। विधान परिषद में भी इस दौरान पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह के खिलाफ विपक्ष दल पीडीपी, सत्ता पक्ष नेकां और कांग्रेस के विशेषाधिकार हनन प्रस्तावाें को मंजूर कर लिया गया।
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