जम्मू। बिल्लू मंदिर रामलीला मंचन के दौरान रविवार को डोगरी डायलॉग पर दर्शकों की तालियों से गूंज उठा। निदेशक हीरा लाल द्वारा लिखी गई डोगरी रामायण में श्रवण कुमार के दृश्यों पर हर कोई भावुक था। वहीं, दूसरी ओर दीवान मंदिर में श्रवण कुमार के अलावा शनिवार को मंचित हुए दृश्यों को दिखाया गया।
बिल्लू मंदिर में सबसे पहले देव लोक दृश्य का मंचन किया गया। इसमें रावण की प्रताड़ना से दुखी सभी देवगण भगवान श्री हरि से प्रार्थना करते हैं कि वह धरती को रावण से मुक्ति दिलाएं। इसके बाद कैलाश तलहटी का मंचन किया गया। कैलाश तलहटी में रावण भगवान शिव के कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास करता है। इस दौरान उनकी बाजू पर्वत के नीचे आ जाती है। तभी रावण भगवान शिव की स्तुति शिव तांडव कर उनको प्रसन्न कर चंद्रहास तलवार वरदान के रूप में ले प्राप्त करता है। भगवान शिव रावण को चेतावनी भी देते हैं कि जिस दिन वह इस तलवार की पूजा नहीं करेगा, उसी दिन उसकी मृत्यु हो जाएगी लेकिन सबसे ज्यादा तालियां डोगरी भाषा में मंचित श्रवण कुमार के दृश्यों को मिली। इसमें पितृ भक्त श्रवण कुमार राजा दशरथ से अपने माता-पिता को तीर्थ यात्रा पर ले जाने की अनुमति लेने आता है। इसके बाद रात को दशरथ के आखेट का दृश्य मंचित किया जाता है। दशरथ को लगता है कि सरयू पर कोई जानवर पानी पी रहा है। इस पर दशरथ मंत्री सुमंत के कहने पर घाट पर शब्द भेदी बाण चला देते हैं लेकिन सरयू के घाट पर कोई जानवर नहीं, बल्कि श्रवण कुमार अपने माता-पिता के लिए पानी भर रहे होते हैं। बाण लगने के कारण श्रवण कुमार की मृत्यु हो जाती है। इस बात की जानकारी जब श्रवण के माता-पिता को लगती है तो वह दशरथ को श्राप देते हैं कि जिस प्रकार से उनकी मृत्यु पुत्र वियोग में हो रही है, उसी प्रकार से दशरथ भी पुत्र वियोग में मरेंगे। हीरा लाल का कहना था कि यह उनकी बहुत पुरानी कोशिश थी कि डोगरी में रामायण हो।
इसके लिए उन्होंने इससे पहले भी कई प्रयोग किए हैं लेकिन अब उनके द्वारा लिखी गई रामायण तैयार है।