जम्मू। राज्य सूचना आयोग के सदस्य एसके शर्मा ने महत्वपूर्ण फैसले में सहायक जिला अधीक्षक (एडीसी) किश्तवाड़ को फटकार लगाते हुए सूचना अधिकार के तहत सर्विस रिकार्ड को मुहैया कराने के आदेश दिए। आयोग ने पाया कि जन सेवक का सर्विस रिकार्ड निजी रिकार्ड नहीं माना जा सकता है।
एडवोकेट असीम साहनी ने एडीसी किश्तवाड़ आरके शावन को उसका सर्विस रिकार्ड दिए जाने की अपील की। एडीसी किश्तवाड़ ही जन सूचना अधिकारी हैं। उन्होंने रिकार्ड देने से इंकार कर दिया और कहा कि सर्विस रिकार्ड निजी है। इसके बाद सज्जाद अहमद नाजर निवासी जामिया मार्केट किश्तवाड़ ने दूसरी अपील की।
इस अपील में एडवोकेट असीम साहनी ने दावा किया कि किसी भी जन सेवक का सर्विस रिकार्ड निजी नहीं हो सकता है। उसने केंद्रीय सूचना आयोग के एक फैसले का भी हवाला दिया। जन सेवक का रिकार्ड प्रशासन की पारदर्शिता के लिए दिया जाना अनिवार्य है। सज्जाद अहमद नाजर ने 31 दिसंबर 2012 को आरटीआई एक्ट 2009 के तहत एडीसी आरके शावन का सर्विस रिकार्ड मांगा।
इस पर एडीसी ने 16 जनवरी 2013 को रिपोर्ट दी कि सर्विस रिकार्ड निजी है। याची ने 5 फरवरी 2013 को डीसी किश्तवाड़ के समक्ष अपील की। डीसी ने भी एडीसी के फैसले को सही ठहराया। याची ने 16 अप्रैल 2013 को कमिश्नर के समक्ष अपील की और मंगलवार को इस पर फैसला दिया गया। सेंट्रल इन्फारमेशन कमीशन के 3 फरवरी 2011 के फैसले का भी हवाला दिया गया। कमीशन ने अपील का निपटारा करते हुए दो सप्ताह में मुफ्त में रिकार्ड मुहैया कराने और फैसले की कापी भी मुफ्त में जारी किए जाने के आदेश दिए।