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औद्योगिक नीति नहीं दे पाई रोजगार

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जम्मू। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने क्षेत्रीय संतुलन और संतुलित विकास के मुद्दे पर औद्योगिक नीति को विफल बताया है। नई औद्योगिक यूनिटें सालाना औसतन सात बेरोजगार युवकों को ही रोजगार दे पाईं। सिडको एवं सिकोप के तहत 1329 यूनिटों की स्थापना नहीं हो पाई और जो इकाइयां स्थापित हुईं, उनमें से 486 इकाइयां बंद हो गईं। उद्योगों की स्थापना से बेरोजगारों को रोजगार मिलने की संभावनाएं जगी थीं, लेकिन औद्योगिक नीति इस मोर्चे पर विफल रही। पांच वर्षों में जम्मू संभाग में 1483 औद्योगिक इकाइयां पंजीकृत हुईं लेकिन इन उद्योगों में सिर्फ 20 हजार 318 युवकों को ही रोजगार मिल सका। इस तरह रोजगार देने का सालाना औसत चार हजार के आंकड़े पर सिमटा रहा। उद्योग विभाग ने क्षमताओं के आकलन के लिए कोई सर्वे नहीं किया, जिससे लगता है कि नई यूनिटों का पंजीकरण क्षेत्रीय विकास योजनाओं पर आधारित नहीं थी।
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कैग ने पाया कि केंद्र और राज्य सरकार की औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के तहत स्थापित यूनिटों में भी रोजगार सृजन की गुणवत्ता को मानिटर करने का कोई कारगर प्रबंध नहीं है। नई औद्योगिक इकाइयों के लिए केंद्र सरकार और रियासत सरकार की ओर से औद्योगिक यूनिटों को जो रियासतें दी गईं, उसका बोझ आम जनता पर पड़ा लेकिन उस अनुपात में रोजगार सृजन नहीं हो सका।
उद्योगों को दिए गए आर्थिक प्रोत्साहन की तुलना में सकल घरेलू उत्पाद में उद्योगों का योगदान कम रहा। उद्योगों ने 7149 करोड़ का योगदान किया, जबकि उन्हें 8340 करोड़ की रियायतें दी गईं। इनमें से रियासत सरकार के 3118 करोड़ 74 लाख और केंद्र सरकार के 5221 करोड़ शामिल हैं। रियासत सरकार ने अनुदान, वैट रियायत और टोल रियायत के रूप में यूनिटों को मदद की। इसी तरह एक्साइज और आयकर में भी केंद्र ने छूट दी। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फैशन टेक्नालाजी के लिए 15 करोड़ रुपये जारी हुए लेकिन प्रोजेक्ट को मंजूरी ही नहीं दी गई। पांच औद्योगिक इस्टेट की स्थापना नहीं हो पाई, जिसकी वजह से 56 करोड़ 65 लाख रुपये का खर्च बेकार हो गया। इसके अलावा 1329 उद्यमियों ने यूनिट शुरू नहीं किए। उन्हें आवंटित प्लाट वापस नहीं लिए गए।
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