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डीएसपी की जमानत अर्जी हुई खारिज

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जम्मू। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामबन एमए चौधरी ने पुलिस डीएसपी सोना उल्लाह नाइक की जमानत की अर्जी को रद कर दिया।
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केस के अनुसार, एयाज अहमद वानी को 1995 में बनिहाल पुलिस स्टेशन के इंचार्ज इंस्पेक्टर सोना उल्लाह नाइक ने हिरासत में लिया था। वानी को यह कहकर बुलाया गया कि उसे पुलिस कांस्टेबल में भर्ती कराया जाएगा। जब वानी घर नहीं लौटा तो उसके पिता अब्दुल रशीद ने उसकी तलाश शुरू की। अब्दुल रशीद थाने पहुंचा और वहां उसने वानी को लाकअप में पाया। पुलिस हिरासत में एयाज की हालत काफी खराब हो गई थी। उसे पहले रामबन के अस्पताल मेें भर्ती कराया। जहां से उसे जीएमसी जम्मू रेफर कर दिया। उसकी 10 नवंबर 1995 को मौत हो गई। उसके पिता ने बेटे की मौत का जिम्मेदार पुलिस को बताया। पूरे मामले की जांच तत्कालीन एसपी रामबन को सौंपी गई। इस जांच के आधार पर रामबन पुलिस स्टेशन मेें 1998 को टार्चर और हत्या का मामला दर्ज किया गया। जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई और केस चार्ज शीट कोर्ट में पेश हुई। जेएनएफ
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कोर्ट ने आरोपी पुलिस अधिकारी को भगोड़ा करार दिया। चार्ज लगाए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल 2008 को ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और चुनौती याचिका रद कर दी। प्रधान जिला सत्र न्यायालय ने दोनों पक्षोें की दलीलें सुनने के बाद पाया आरोपी के खिलाफ हिरासत में मौत का मामला दर्ज है। मौजूदा समय में वह डीएसपी है। पूरे हालात पर गौर करने के बाद जमानत की अर्जी को रद करने के आदेश जारी किए। जेएनएफ
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