जम्मू। रियासती में 12वीं और 13वीं योजना के तहत आठ हजार मेगावाट तक बिजली उत्पादन को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए निजी भागीदारों को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है, ताकि रियासत को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा सकें।
जम्मू में वीरवार को जम्मू कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन और उद्यमियों के मध्य हुई बैठक के दौरान प्रबंधक निदेशक बशारत अहमद डार ने यह विचार प्रकट किए। बैठक में राज्य के उद्यमियों के माध्यम से शुरू किए जाने वाले मिनी पन बिजली परियोजनाओं से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा हुई। प्रबंधक निदेशक ने इस अवसर पर कहा कि रियासत में पन बिजली उत्पादन की अपार क्षमताएं है और 2वीं और 13वीं योजना के तहत आठ हजार मेगावाट तक बिजली उत्पादन को बढ़ाया जाएगा। इसमें आईपीपी मोड के अंतर्गत परियोजनाएं भी शामिल है।
उन्होंने बताया कि 450 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता वाली बगलिहार दो पर काम तेजी से चल रहा है। नौ मेगावाट क्षमता वाली दाह और 37.5 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता वाली परनाई परियोजना की अलाटमेंट भी क्लीयर कर दी गई है। उन्होंने सूचना दी कि हाइडल पालिसी 2011 के अंतर्गत पांच परियोजनाएं आईपीपी मोड के तहत निर्माण की जा रही है। इनमें 40 मेगावाट क्षमता वाली अंस एक, 45 मेगावाट की बिचलारी, 27 मेगावाट की कंजिल, 12 मेगावाट की गिरजन की गली और सात मेगावाट क्षमता की चंदनवाड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि रियासत में पन बिजली का अपार क्षमताओं के विकास से आने वाले समय में रियासत का आर्थिक विकास तेजी से होगा। इससे न केवल ढांचागत विकास होगा। ओद्योगिकीकरण भी बढ़ेगा और बेरोजगार की समस्या का भी काफी हद तक हल होगा। प्रबंधक निदेशक ने कहा कि सरकार स्थानीय उद्यमियों की बिजली क्षेत्र में भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
चैंबर आफ कामर्स के प्रतिनिधियों ने इस अवसर आग्रह किया कि योग्यता तरीकाकार में और रियायतें दी जाएं ताकि ज्यादा से ज्यादा स्थानीय उद्यमी बिडिंग प्रक्रिया में शामिल हो सकें। इसी बीच प्रतिभागियों के आग्रह पर 13 आईपीपी मोड़ के अंतर्गत परियोजनाओं के लिए बिड जमा करवाने की अंतिम तारीख को 17 नवंबर से बढ़ाकर 30 नवंबर करने का फैसला भी बैठक में लिया गया।
बैठक में चैंबर आफ कामर्स जम्मू के प्रधान वाईवी शर्मा, एमसीआईजे के प्रधान अनिल सूरी, सेल्फ हेल्प ग्रुपों के प्रतिनिधियों ओर कारपोरेशन के अधिकारी मौजूद रहे।