जम्मू। नेशनल फेडरेशन आफ ब्लाइंड की ओर से हाईकोर्ट में डिस्एबलिटी एक्ट 1998 लागू किये जाने को लेकर दर्ज की गई जनहित याचिका पर कोर्ट की ओर से रियासत के मुख्य सचिव से इस मामले में निजी हलफनामा दायर कर इस मामले में की गई कार्रवाई के संबंध में जानकारी देने के निर्देश दिए गये थे। बुधवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के निर्देश पर मुख्य सचिव की ओर से हलफनामा दायर किया गया।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएम कुमार और जस्टिस मोहम्मद याकूब मीर की खंडपीठ ने इस मामले में वरिष्ठ अतिरिक्त एडवोकेट जनरल गगन बसोत्रा से एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट के संबंध में जानकारी मांगी। एक्सपर्ट कमेटी की ओर से 27 जनवरी 2012 को जारी सरकारी आदेश के आदेश के तहत आयुक्त सचिव समाज कल्याण विभाग के नेतृत्व में रिपोर्ट तैयार की गई थी। तीन सितंबर 2012 को तैयार की गई रिपोर्ट को डिवीजन बेंच के समक्ष पेश किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि कमेटी द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों में खाली पदों की शिनाख्त की गई है। कोर्ट में पेश अतिरिक्त सचिव बशीर अहमद वाणी की ओर से बताया कि विभिन्न सरकारी विभागों में पदों की शिनाख्त की गई है और इस मामले में आर्टिकल 21 को ध्यान में रखते हुये किसी भी विभाग को छोड़ा नहीं गया है।
इस पर कोर्ट ने पाया कि महज विभिन्न सरकारी विभागों में पदों की शिनाख्त करने से मसले का हल नहीं होगा। इसके तहत कोर्ट ने समाज कल्याण विभाग के आयुक्त सचिव को एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर शिनाख्त किये गये पदों में से खाली पदों की संख्या की दो सप्ताह में जानकारी देने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि खाली पदों को भर्ती एजेंसियों (पीएससी, एसएसआरबी) को क्यों रेफर नहीं किया गया। कोर्ट का मानना था कि इस मामले में जारी निर्देश के पालन की जिम्मेदारी मुख्य सचिव की होगी। कोर्ट ने आदेशों की अवहेलना किये जाने को गंभीरता से लेते हुये कहा कि अलग अलग बहाने बनाकर बचाव का रास्ता निकालने की कोशिश की गई और एक्ट को लागू नहीं किया गया। कोर्ट का कहना था कि एक्ट 1998 की भाषा और उसका स्वरूप बहुत ही साधा है। सारे बहाने बेकार हैं। जेएनएफ