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लाचारों पर वार, बस वालों की सरकार

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जम्मू। शहर में अगर कहीं कार, थ्री व्हीलर जैसे हल्के वाहन खड़े मिल गए तो समझो उनका चालान होना तय है, लेकिन बात जब जाम लगने के मुख्य कारण बनने वाले बस, आटो रिक्शा और मेटाडोर पर कार्रवाई करना ट्रैफिक पुलिस के लिए मुश्किल हो जाता है। यानी कार कहीं खड़ी मिल गई तो ट्रैफिक पुलिस वाले बख्शते नहीं, लेकिन शहर के मुख्य बस अड्डे के सामने अव्यवस्थित और अवैध तरीके से खड़ी होने वाली बसें न सिर्फ लोगों के लिए समस्या का कारण हैं, बल्कि आए दिन दुर्घटनाओं को आमंत्रण भी देती हैं। उन पर कोई कार्रवाई होती नहीं दिखती। हाईवे पर बेतरतीब खड़ी मेटाडोर और बसें हादसों को न्योता देती हैं। बस स्टैंड को मल्टी स्टोरी पार्किंग बनाने की प्रक्रिया के तहत एक साल पहले ट्रैफिक पुलिस ने बीसी रोड पर बसों के खड़े होने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद जब भी डिवीजनल कमिश्नर की ओर से अवैध बसों या वाहनों को हटाने का आदेश जारी होता है, तो स्थानीय पुलिस एक-आध दिन औपचारिकता पूरी कर देती है और उसके बाद फिर वही सिलसिला शुरू हो जाता है। पुलिस पर कोई राजनीतिक दबाव है या फिर कोई अन्य स्वार्थ, अवाम की इस समस्या को कभी गंभीरता से नहीं लिया जाता। बस स्टैंड के इन गेट तथा आउट गेट पर ज्यादा दबाव होता है। बुधवार क ी रात को बीसी रोड पर आर्म्ड पुलिस जवानों और बस चालकों में विवाद हो गया था, जिसका मुख्य कारण आर्म्ड पुलिस का वाहन बैक होते हुए एक बस से टकरा गया था। इसके बाद आर्म्ड के जवानों और बस एजेंटों ने खूब बवाल काटा था। अगले दिन भी तनाव बना रहा है, लेकिन आपरेटरों ने अपने स्लीपर कोच बीसी रोड पर बीचोंबीच खड़े किये। डीएसपी कुलबीर हांडा ने आर्म्ड जवानों और एजेंटोें के बीच हुए विवाद को लेकर बताया कि किसी भी पक्ष से शिकायत नहीं मिलने की वजह केस दर्ज नहीं किया गया है। बसों के बाहर निकलने के आउट गेट के बीचोंबीच पुलिस की मेहरबानी से फल विक्रेता अपनी फड़ियां तथा रेहिड़यां लगाकर रास्ता बंद करके बैठे रहते हैं।
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