जम्मू। प्रिंसिपल सेशन जज कठुआ एमके हंजूरा की अदालत ने अपहरण और बलात्कार के आरोपों में ट्रायल का सामना कर रहे सुदेश कुमार और भोली देवी को बरी कर दिया। जबकि मामले की अभियोक्त्री को नोटिस जारी कर सवाल किया कि गलत सबूत पेश करने के कारण क्यों न उसे सजा दी जाए। केस के अनुसार, अभियोक्त्री का नौ अप्रैल 2011 को अपहरण हुआ और उसके साथ लगातार यौन शोषण किया गया। उसकी शिकायत पर पुलिस ने आरपीसी की धारा 363, 376, 109 के तहत मामला दर्ज किया। साथ ही जांच पूरी करने के बाद अदालत में चालान पेश किया। प्रिंसिपल सेशन जज ने पीपी रवि कुमार और आरोपी के वकील बीबी भगोत्रा की दलीलें सुनी। बहस के दौरान विरोधाभास नजर आया है। इतना ही नहीं, 27 दिसंबर 2011 को अभियोक्त्री ने अपने बयान में कहा कि वह आरोपी को जानती नहीं है। जबकि नौ अप्रैल 2011 को वह लोकल मार्केट में किताबें खरीदने गई और कुछ लड़कों ने उसे जबरन उठाया और पुलिस अथारिटी का कहना है कि आरोपी वीर चंद है। सीआरपीसी 164 ए के तहत अभियोक्त्री के रिकार्ड किए गए बयान और फिर उसका बयान से मुकरने पर संदेह होता है। जस्टिस ने कहा कि गलत तथ्य देने के मामले में क्यों न उसे सजा दी जाए। जेएनएफ