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Udhampur News: एक हाथ में लाठी दूसरे में अपनों का सहारा, धीमी रफ्तार में भी वोट डालने पहुंचे बुजुर्ग

Wed, 02 Oct 2024 04:32 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
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91.3 प्रतिशत ग्रामीण मतदान केंद्रों में अलग दिखा नजारा, चाय-पानी की चुस्की और गपशप के साथ चिंतामुक्त होकर लोगों ने किया मतदान
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सौरभ सागर
उधमपुर। न पहाड़ों की दूरी की चिंता, न कच्चे डगमगाते रास्तों का डर, खेतों से गुजरती पगडंडियों से होते हुए बुजुर्ग पूरी आस्था से लोकतंत्र के महोत्सव में शामिल होते नजर आए। प्रदेश के प्रति बुजुर्गों का यह जज्बा उधमपुर जिले की चारों सीटों पर देखने को मिला।
खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किए गए मतदान केंद्रों में नजारा कुछ अलग ही रहा। मानो किसी बहुत बड़े एक ही परिवार के सदस्य कतारों में खड़े होकर मतदान करने का इंतजार कर रहे हों। बुजुर्ग एक हाथ में लाठी और दूसरे हाथ में अपनों का सहारा लेकर कच्ची पगडंडियों से डगमगाते हुए मतदान केंद्रों में पहुंच रहे थे।
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कोई अपनी पोती-पोते को लेकर तो कोई नन्ही परपोती-पोते की चुलबुली मुस्कान के साथ मतदान केंद्रों में अपनी भारी का इंतजार करता नजर आया। मतदान केंद्रों में पहुंचते बुजुर्गों की सहूलियत के लिए वहां मौजूद अन्य ग्रामीण व्यवस्थाओं में जुटते दिखाई दिए। कोई बैठने की व्यवस्था करता तो कोई व्हील चेयर पर मतदान डालने की। चाय पानी तो ऐसे पूछ रहे थे मानों घर पर कोई महमान आया हो।
लेकिन किसी के चेहरे पर राजनीति, पार्टी विशेष या उम्मीदवार के समर्थन को लेकर शिकन या मतभेद नजर नहीं आया जो उनकी लोकतंत्र के प्रति सच्ची भावना और ग्रामीणों के बीच आपसी भाईचारे व एकता का संदेश दे रहा था।
गौरतलब है कि मंगलवार को हुए मतदान में जिले के 654 में से 598 मतदान केंद्रों में ग्रामीण मतदाताओं ने मतदान किया। इनमें अधिकतर आबादी पहाड़ी और दुर्गम इलाके से संबंधित है। जिले की चारों सीटों पर उम्मीदवारों की हार जीत का फैसला लगभग 91.34 प्रतिशत मतदान केंद्रों में ग्रामीण जनता ने तय कर रखा है। (संवाद)




लैन बड़ी टैम बड़ा लग्ना, वोट पाइगे हि जाना
प्रथम मतदाता से लेकर प्रत्येक वर्ग के लोग लंबी कतारों की परवाह किए बिना मतदान के लिए उत्साहित नजर आए। कोई मतदान करने के बाद केंद्र के बाहर यार दोस्तों की चौपाल लगाकर बैठा था, तो कोई चाय की चुस्की के साथ परिणामों को लेकर अपना गणित लगा रहा था। इसी दौरान डोगरी बोली में एक व्यक्ति की आवाज आती है इते ते बड़ी लंबी लैन लगी दि, टैम बड़ा लग्ना तो, दूसरा जवाब देता है ते फि के होया वोट ते एसी पाइगे हि जाना, चल बल्गी लेने आ। यानि एक मतदाता लंबी कतार को देखकर परेशान हो गया तो दूसरे ने जवाब दिया कि जो भी हो वोट तो डालने की जाएंगे।
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कच्ची पगडंडियां भी रोक पाई बुजुर्गों का जज्बा
ग्रामीण मतदान केंद्र में कुछ ऐसे ही लाइव नजारे सरकारी मिडिल स्कूल लांसी में स्थापित क्रिमची-ए पोलिंग केंद्र में भी देखने को मिले। जहां सड़के से लगभग 500 मीटर की दूरी पर खेतों के बीच स्थापित इस मतदान केंद्र में पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं था। 86 साल की शकुंतला देवी अपनी लगभग 3 वर्षीय परपोती के साथ और 82 साल की गुलाम बीबी अपनी बहू के साथ कच्ची पगडंडी पर डगमगाते रास्ते से खेतों के बीच से होते हुए लाठी और अपनों का सहारा लेकर मतदान केंद्र पहुंचीं। बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए मतदान करना उनकी जिम्मेदारी है। देश तरक्की तभी करेगा जब बेहतर सरकार होगी। क्रिमची-मानसर के मदन लाल भी एक हाथ में लाठी और दूसरे में अपनी पत्नी का सहारा लिए मतदान केंद्र पहुंचे। उनके साथ लगभग दो वर्षीय पोती भी थी।
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