उधमपुर में कश्मीर के तीन जिलों के लिए 38.29 फीसदी डाले गए वोट
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। आतंकवाद की जद में आकर करीब 35 साल से विस्थापन का दर्द झेल रहे कश्मीर विस्थापित मतदाता सम्मानपूर्वक घर वापसी चाहते हैं। इसी आस में वे हर चुनाव में वोट करते हैं, ताकि कोई ऐसी सरकार आए जो उनके सुरक्षित और सम्मानपूर्वक घर वापसी की उम्मीद को पूरा कर दे। उनके लिए अपने होमलैंड में रोजगार और पुख्ता सुरक्षा का बंदोबस्त करे ताकि उनको दोबारा से विस्थापन का दर्द न झेलना पड़े।
यह बातें उधमपुर में कश्मीरी विस्थापितों के लिए सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) उधमपुर में बनाए गए पोलिंग स्टेशन पर मतदान करने पहुंचे कश्मीर विस्थापित मतदाताओं ने कहीं।
बुधवार को यहां कश्मीर के तीन जिलों (गांदरबल, श्रीनगर और बड़गाम) के 15 विधानसभा क्षेत्र के लिए हो रहे मतदान के लिए कश्मीर विस्थापितों के लिए 15 मतदान केंद्र बनाए गए थे। इसके लिए उधमपुर में कुल 363 मतदाता नामांकित हैं। सुबह मतदान शुरू होते हुए यहां बनाए गए पोलिंग स्टेशन पर कश्मीर विस्थापित परिवारों का मतदान के लिए पहुंचना शुरू हो गया था।
सुबह 7 बजे शुरू हुआ मतदान शाम 6 बजे संपन्न हुआ, जिसमें समय खत्म होने तक कुल 363 में से 139 मतदाताओं ने वोट डाला। कुल 38.29 प्रतिशत मतदान हुआ। इस बीच चुनाव पर्यवेक्षकों ने भी मौके पर पहुंच मतदान का निरीक्षण किया और प्रदान की गई सुविधाओं का जायजा लिया। मौके पर मौजूद अधिकारियों से बात की और उन्हें जरूरी दिशा निर्देश भी दिएं।
मतदाताओं की सुविधा के लिए पोलिंग स्टेशन पर बैठने पीने के पानी के साथ सुरक्षा व्यवस्था का भी कडा प्रबंध किया गया था। आवाजाही के लिए बसें भी लगाई गई थीं। इसके लिए यहां दिव्यांग व बुजुर्ग मतदाताओं की सुविधा के लिए व्हील चेयर का भी खास प्रबंध रखा गया था।
वोट डालने पहुंचे मतदाताओं में खासा जोश व उत्साह नजर आया। अधिकतर का यही कहना था कि वह इस बार ऐसी सरकार चाहते हैं जो पूरे सम्मान और सुरक्षा के साथ उनकी घर वापसी का पुख्ता इंतजाम करें। उनके लंबित मामलों को सुलझाए। कश्मीर में उनकी सुरक्षा व्यवस्था कडी हो ताकि वह अपने घर वापस कश्मीर जा पाएं और दोबारा वहां विस्थापन का दर्द झेलने की नौबत न आए।
हम ऐसी सरकार चाहते हैं, जो हमारे विस्थापन के दर्द को समझे और हमारी घर वापसी सुनिश्चित करे। हमारे बच्चों के लिए कश्मीर में रोजगार दे और वहां हमारी सुरक्षा को यकीनी बनाए ताकि हमें दोबारा से वहां विस्थापित होने के लिए मजबूर न होना पडे। दस साल बाद यहां सरकार बनने जा रही है, उम्मीद है इस बार हमारे लिए भी कुछ अच्छा होगा।
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सावित्री देवी, कश्मीरी विस्थापित
हम कश्मीरी से विस्थापित होकर सालों से देश के अलग-अलग जगहों पर जिंदगी बिता रहे हैं। हमारे ज्यादातर बच्चे निजी क्षेत्रों में नौकरी कर रहे हैं उनके लिए सरकारी नौकरी का कोई प्रबंध नहीं हैं। इसलिए हम चाहते हैं कि हमारी घर वापसी संभव हो सके, हमारे बच्चों को कश्मीर में ही सरकारी नौकरियां मिले, ताकि हमें अन्य राज्यों में दर-दर की ठोकरें न खानी पड़ें।
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बिंदू, कश्मीरी विस्थापित
वोट हमारा संवैधानिक अधिकारी है, बेशक हम कहीं भी रहें लेकिन हमें इसका इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। इसके इस्तेमाल से हम एक ऐसी सरकार चुनने में अहम भूमिका निभाते हैं, जो हमारे मसलों का समाधान करती हैं। कश्मीर विस्थापित समुदाय का मुख्य मुद्दा घर वापसी है और हम यही चाहते हैं कि जो सरकार बने वे इसपर प्राथमिकता के साथ काम करे।
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हेमा, कश्मीरी विस्थापित
जो भी सरकार बने वे कश्मीर में खुशहाली लाने के लिए काम करे। हम लगभग साढे़ तीन दशक से विस्थापन का दर्द झेल रहे हैं। इस बीच कई सरकारें आई और गईं, वादे सभी ने किए लेकिन उनकी सुरक्षित वापसी कोई नहीं करा सका है। उम्मीद है इस बार बनने वाली सरकार प्राथमिकता के साथ इस पर काम करेगी।
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वीणा भट, कश्मीरी विस्थापित