सुद्धमहादेव के साथ लगते मानतलाई में पहुंचे श्रद्धालु
चिनैनी। सुद्धमहादेव धार्मिक स्थल का नाम सुद्धांत रक्षा के वध के बाद पड़ा। मानतलाई में पुजारी मक्खन लाल ने बताया कि वह कुछ वर्षों तक सुद्धमहादेव मंदिर में भी पुजारी रहे हैं।अब उन्हें मानतलाई मंदिर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि सुद्धमहादेव का प्राचीन मंदिर लगभग तीन हजार साल पुराना है। उन्होंने बताया कि प्रचलित कथा के अनुसार भगवान शिव का एक भक्त जो राक्षस था, उसका नाम सुद्धांत था। सुद्धमहादेव मंदिर में पूजा करने के दौरान राक्षस ने माता पार्वती को डराया था। माता पार्वती ने भगवान शिव को रक्षा करने के लिए पुकारा। इसके बाद भगवान शिव ने हिमालय पर्वत से अपने त्रिशूल के साथ राक्षस का वध कर दिया। राक्षस को त्रिशूल लगने के बाद उसने ओम नमः शिवाय का जाप किया तो भगवान शिव ने प्रकट होकर राक्षस को दर्शन दिए। राक्षस ने भगवान शिव से कहा कि वह उनके दर्शन कर सभी कामनाओं को पूरी कर चुका है अब उसकी कोई भी कामना नहीं है। सिर्फ एक कामना है कि आपके नाम के साथ उसका नाम भी जुड़े। इसके बाद भगवान शिव तथास्तु कहकर अंतर्ध्यान हो गए। तभी से ही सुद्धमहादेव का नाम चला आ रहा है। ऐतिहासिक मेला भी इस स्थल पर आयोजित होता है। संवाद