उधमपुर: संत सुभाष शास्त्री जी प्रवचन करते हुए तथा प्रवचन का आनंद लेते हुए संगत.
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उधमपुर। अखंड परमधाम आश्रम शिव रैहंबल चक में शनिवार को श्री शिव महा पुराण कथा का शुभारंभ हुआ। यह कथा 7 अगस्त तक जारी रहेगी, जिसका वाचन सुभाष शस्त्री कर रहे हैं। कथा में पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
कथावाचक ने संगत को बताया कि आपमें से किसी ने भी कभी दुख की कामना नहीं की होगी। हर कोई हर पल सुख की ही कामना करता है। इस सुख के लिए वह इस संसार में उपलब्ध हर साधन को जुटाने में दिन-रात एक कर देता है। कुछ उन्हें प्राप्त भी कर लेते हैं। लेकिन, वास्तविक सुख को वह फिर भी प्राप्त नहीं कर पाते। आखिर इसका कारण क्या है?
उन्होंने कहा कि यह सुख न मिलने का कारण है अज्ञान। अर्थात ज्ञान का न होना! यदि सुख इस संसार की वस्तुओं में होता तो वह जो इनका व्यापार करते हैं या जिनके पास यह वस्तु अधिकतम संख्या में होती हैं, क्या वह सुखी हैं? नहीं। असल में सुख वस्तु, व्यक्ति या पदार्थ में व्याप्त नहीं रहता। इसके विपरीत यह सभी दुखों को पैदा करने में सहायक सिद्ध होती हैं।
उन्होंने समझाया कि यदि आप सचमुच आत्मिक सुख की कामना करते हो तो इसका उपाय है, ब्रह्मविद्या। इससे ही आपकी अविद्या मिटेगी, अज्ञान हटेगा, भ्रम मिटेगा। आत्मानुभव से जड़-चेतन की ग्रंथि खुल जाएगी और वास्तविक सुख का प्रकाश होगा। इस संसार में तीन चीजें बहुत ही दुर्लभ हैं। मनुष्य का जन्म, मोक्ष और संत कृपा। आप सत्संग में आए, तो इसका अर्थ है कि मनुष्य जन्म पाकर आपको मोक्ष की इच्छा है। इसीलिए, आप किसी आत्मज्ञानी संत के सत्संग में आ पाए। अपने कल्याण के लिए नित्य शुभ कर्म करते हुए सत्य का संग यानी सत्संग अवश्य करें।
उधमपुर: संत सुभाष शास्त्री जी प्रवचन करते हुए तथा प्रवचन का आनंद लेते हुए संगत.- फोटो : UDHAMPUR