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सुनवाई नहीं होने पर ग्रामीण खैरी-लड़े सड़क की मरम्मत को मजबूर

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उधमपुर। जिला मुख्यालय से करीब चार किलोमीटर दूर खैरी इलाके के ग्रामीण कामकाज छोड़ कर खैरी-लड़े सड़क की मरम्मत कर रहे हैं। रोजाना बच्चों से लेकर महिलाएं और बुजुर्ग सहित हर वर्ग के लोग काम में जुट रहे हैं, ताकि गांव तक यातायात सुविधा बहाल हो सके। सड़क का निर्माण तो दूर उसकी मरम्मत की सुध नहीं लेने पर ग्रामीणों में सरकार, प्रशासन और विभाग के खिलाफ खासा रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि खैरी-लड़े सड़क की हालत इतनी अधिक खराब हो चुकी है कि उस पर वाहन तो दूर पैदल चलना भी संभव नहीं है। चार बार बैक टू विलेज कार्यक्रम में समस्या उठाने के बावजूद किसी ने सुध नहीं ली है।
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जानकारी के अनुसार कई सालों तक मंत्रियों, विधायक व प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष मांग को उठाने के बाद किसी ने गौर नहीं किया तो लोगों ने स्वयं इसे बनाने का निर्णय लिया। 2018 में 12 लाख रुपये एकत्र कर खैरी से लड़े तक चार किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया। लेकिन सड़क पर तारकोल तो नहीं डाली जा सकी। मगर लोगों को वाहन योग्य सड़क की सुविधा मिल गई। इसके बाद इसकी मरम्मत नहीं होने और तारकोल नहीं बिछाने के चलते इसकी हालत दिनप्रतिदिन खराब होती गई। बरसात में सड़क पूरी तरह से बदहाल हो चुकी है। कई बार मांग उठाने के बाद जब कोई हल नहीं निकला तो मंगलवार को ग्रामीणों ने मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर जल्द सड़क की मरम्मत के साथ तारकोल नहीं डाली गई तो वह आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
एक हजार से अधिक आबादी सड़क पर निर्भर
खैरी से लड़े तक चार किलोमीटर मार्ग पर लोड़ बलि पंचायत के चार वार्ड के 200 परिवार निर्भर हैं, जिनकी आबादी एक हजार से अधिक है। सड़क की हालत खराब होने के बाद ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। बच्चों का स्कूल पहुंचना मुश्किल हो गया है। इसके साथ ही बीमार होने पर मरीज को अस्पताल पहुंचाने में दिक्कत हो रही है।
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सड़क से ही गांव या पंचायत का विकास संभव होता है, लेकिन उनके गांव को आज तक सरकार की ओर से सुविधा नहीं मिली है। खुद सड़क का निर्माण करवाया, लेकिन अब सड़क बदहाल को चुकी है। इसकी मरम्मत के लिए कार्यालयों के चक्कर काटने के बाद भी किसी ने सुध नहीं ली। अब मजबूरन खुद ही मरम्मत करने को मजबूर हैं।
- सरदार खान, स्थानीय निवासी
बैक टू विलेज के चारों चरणों में अपनी परेशानी के बारे में सरकारी अधिकारियों को अवगत करवाया। यह भी बताया कि इस सड़क का निर्माण अपनी राशि से किया है। अधिकारियों ने अपनी डायरी में परेशानी को लिखा और फिर किसी ने इसका जिक्र भी नहीं किया। अब हालात यह है कि सड़क की मरम्मत के लिए बच्चों व महिलाओं को भी मेहनत करनी पड़ रही है।
- मोहम्मद रशीद, स्थानीय निवासी
करीब छह वर्ष पहले पीएमजीएसवाई ने सड़क बनाने की योजना तैयार की थी। इसके लिए ग्रामीण विकास विभाग ने दस लाख रुपये भी मंजूर किए थे। लेकिन फिर तकनीकी खामी होने की बात कह कर सड़क का निर्माण करने में असहमति जताई। लेकिन सभी ने मिलकर पैसे इकट्ठे किए और पीएमजीएसवाई को चार किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण करके दिखाया। अब कोई इसी मरम्मत में भी मदद नहीं कर रहा है।
- मोहम्मद अशरफ, स्थानीय निवासी
ग्रामीणों ने अपनी मेहनत की कमाई से इस सड़क का निर्माण किया है। लेकिन अब उनकी मेहनत पर ही पानी फिरता जा रहा है। सड़क की हालत इतनी ज्यादा खराब हो गई है कि इस पर वाहन चलाना संभव नहीं हो पा रहा है। किसी बीमार को अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। सरपंच, बीडीसी चेयरमैन सहित सभी के सामने अपनी परेशानी को रखा है, लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया है।
- नसीमा बेगम, स्थानीय निवासी
जब वोट लेने का समय जाता है तो उनकी पंचायत में नेताओं का पहुंचना शुरू हो जाता है और बड़े बड़े आश्वासन देकर लौट जाते हैं। नेताओं को वोट मिल जाते हैं तो फिर कोई भी उनकी सुध लेने के लिए नहीं पहुंचता है। नेताओं के झूठे आश्वासनों से अब परेशान हो चुके हैं।
- जट्टी, स्थानीय निवासी
बैक टू विलेज के सभी चरणों में इस समस्या को प्रमुखता के साथ रखा गया है। ग्रामीण विकास विभाग की तरफ से इसका स्थायी समाधान निकालने का हर संभव प्रयासंकिया जा रहा है। यह सारा इलाका राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे पर है। इस गांव तक पहुंचने के लिए शारदा माता मंदिर की तरफ से भी सड़क बनाने का प्रयास किया गया था, लेकिन वन विभाग की भूमि होने के कारण इसमें दिक्कत सामने आई है।
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- सरदारा बेगम, बीडीसी चेयरमैन
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