उधमपुर/रामनगर। उधमपुर से चनूनता रोड के खस्ताहाल होने को लेकर चनूनता ग्राम के लोगों ने सड़क बंद कर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राजस्व विभाग की मिलीभगत से इस रोड पर कुछ लोगों ने स्टे लगा दिया है। उनका कहना है कि यह जमीन उन लोगों की है। अब विभाग साबित करे कि 30 साल पहले बने इस रोड पर आखिर किसका अधिकार है?
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह रोड घोरडी, चनूनता, पंजग्राई, नगरोटा, हंसा तथा रामनगर के कई इलाकों को जोड़ता है। लेकिन, इस रोड की हालत इतनी खराब है कि इस पर हमेशा गंभीर हादसों का अंदेशा बना रहता है। बरसात के बाद पूरी सड़क पर कीचड़, फिसलन बढ़ जाने से समस्या विकराल हो जाती है। कई वाहन सड़क में धंस जाते हैं, जिन्हें बाहर निकालने के घंटों की मशक्कत करनी पड़ती है। समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग से अपील की गई है लेकिन अभी तक कोई उचित कदम नहीं उठाया गया।
उन्होंने डीडीसी से अपील की कि सिर्फ कार्यालय में बैठकर एसी की हवा खाने से लोगों के मसले हल नहीं होते। इसके लिए आप रोड पर आकर उनके मसले सुनिए और उनका समाधान करिए। मौके पर मौजूद डीडीसी पार्षद जगानू परीक्षित सिंह ने कहा कि इस सड़क के निर्माण के लिए 14 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं, लेकिन राजस्व विभाग करीब 30 साल पहले बने इस रोड की गिरदावरी नहीं लगा पाया। जिसके कारण सड़क की जमीन पर विवाद पैदा हुआ और कुछ जमीन मालिकों ने चार साल से इस पर स्टे ऑर्डर लिया है।
उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग को यह साबित करना होगा कि यह सड़क है या लोगों की जमीन है? इस पर पिछले 30 साल में तीन बार तारकोल भी डाला गया है। अब राजस्व विभाग की मिलीभगत से कुछ लोगों ने इस पर मालिकाना हक जताते हुए स्टे लगा दिया है। उन जमीन मालिकों से अनुरोध है कि सड़क के चौड़ीकरण का काम चाहे रोक लें, लेकिन पहले से बनी सड़क पर तारकोल डालने दें, ताकि लोगों की परेशानी का समाधान हो सके।