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अविश्वास प्रस्ताव के सात दिन बाद भी नप अध्यक्ष ने नहीं साबित किया बहुमत

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उधमपुर। नगर परिषद अध्यक्ष डॉ. जोगेश्वर गुप्ता के खिलाफ सभी 21 में से 11 पार्षदों की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव की आगामी प्रक्रिया पर असमंजस पैदा हो गई है। इसका मुख्य कारण अविश्वास प्रस्ताव की प्रति अधिकारिक तौर पर अध्यक्ष को न सौंपा जाना बताया जा रहा है। इसके चलते सात दिन बीत जाने के बाद भी अध्यक्ष के बहुमत साबित करने के लिए बैठक नहीं बुलाई गई।
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गौरतलब है कि 1 सितंबर को नप के 11 पार्षदों ने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर इसे सीईओ अमित चौधरी को सौंपा था और जिला विकास आयुक्त कृतिका ज्योत्सना को भी इसकी प्रति सौंपी गई थी। म्यूनिसिपल अधिनियम के अनुरूप अविश्वास प्रस्ताव पेश होने के बाद अध्यक्ष को सात दिन में हाउस की बैठक बुलाकर अपना बहुमत साबित करना था। लेकिन, अध्यक्ष ने अधिकारिक तौर पर अविश्वास प्रस्ताव की प्रति न मिलने की बात कहकर पार्षदों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया पर ही सवाल खडे़ कर दिए।
उनका कहना है कि उन्हें अधिकारिक तौर पर अविश्वास प्रस्ताव की प्रति नहीं सौंपी गई है। इसलिए, वह बहुमत साबित करने के लिए बाध्य नहीं हैं। इस मामले को लेकर अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले कुछ पार्षदों का कहना है कि व्हाट्सएप और सीईओ के माध्यम से नप अध्यक्ष को अविश्वास विश्वास की प्रति भेज दी गई है। अब वह जानबूझकर अंजान बनने का प्रयास कर रहे हैं। नियम के अनुरूप सात दिन के भीतर उन्हें हाउस की बैठक बुलाकर अपना बहुमत साबित करना था। लेकिन, उन्होंने ऐसा नहीं किया है। इसलिए, अब वह आगामी आधिकारिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। अब अगले दो दिन में बैठक कर इस मामले पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
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उच्चाधिकारियों के निर्देश पर होगी आगामी कार्रवाई
अध्यक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव की प्रति न मिलने के मामले पर सीईओ का कहना है कि जानकारी के मुताबिक पार्षदों ने व्हॉट्सएप से अध्यक्ष को अविश्वास की प्रति दी है। कानून के मुताबिक अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पार्षदों को अध्यक्ष को इसकी प्रति सीधे तौर पर देनी होती है। फिर चाहे वे इसे ई-मेल से दें, रजिस्टर्ड पोस्ट से दें या हस्तगत दें। व्हाट्सएप से भेजी गई अविश्वास की प्रति के मामले को लेकर विचार किया जा रहा है कि इसे माना जाए या नहीं। इस मामले में हायर अथॉरिटी से प्राप्त निर्देशों के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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नियमानुसार बहुमत साबित करने के लिए अध्यक्ष को सात दिन का समय दिया जाता है। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो अगले तीन दिन में फ्लोर टेस्ट करवाया जाता है। फ्लोर टेस्ट के लिए फिलहाल दो दिन शेष हैं। नियमानुरूप आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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- अमित चौधरी, नप सीईओ
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