उधमपुर। शहर के सुई इलाके में कई माह से जमा 22 हजार टन गंदगी के निस्तारण के लिए स्थानीय निकाय निदेशक पुनीत शर्मा खुद मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) के टेंडर करवाएंगे। दो माह से अधिक समय बीतने के बाद भी मेकेनिकल विंग के टेंडरिंग करवाने में विफल रहा है। इससे नाराज हो कर स्थानीय निकाय निदेशक ने अपने कार्यालय से ही टेंडर जारी करने का फैसला लिया है।
सुई इलाके में जमा गंदगी के कारण स्थानीय लोगों की दिक्कतें दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। तीन साल पहले नगर परिषद ने सुई इलाके में किल वेस्ट प्लांट लगा कर शहर की गंदगी को वहां फेंकना शुरू किया था। यहां सूखी गंदगी का निस्तारण किया जाता था। लेकिन 2021 में कर्मचारियों की कमी के कारण प्लांट बंद कर दिया गया। इस कारण सुई में गंदगी जमा होना शुरू हो गई। मौजूदा समय में 22 हजार टन से अधिक गंदगी जमा हो चुकी है। पांच माह पहले स्थानीय लोगों ने इसका विरोध जताया था।
इसके बाद अभी तक नगर परिषद को गंदगी को फेंकने के लिए दूसरा स्थान नहीं मिला है। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद नगर परिषद ने मंडलायुक्त और स्थानीय निकाय निदेशक के सहयोग से मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी लगा कर गंदगी के निस्तारण का प्रयास शुरू किया। मंडलायुक्त ने निर्देश के बावजूद अभी तक गंदगी का निस्तारण नहीं हो सका है। दो माह पहले मेकेनिकल विंग को टेेंडरिंग के निर्देश दिए थे, जो नहीं हो पाए। नाराज होकर स्थानीय निकाय निदेशक ने अधिकारियों को फटकार लगाई और अपने कार्यालय से इसका टेंडर जारी करने का फैसला लिया है।
एमआरएफ का टेंडर जारी करने में मैकेनिकल डिविजन ने गंभीरता के साथ काम नहीं किया और इसी कारण डायरेक्टर लोकल बाडी को टेंडर जारी करने का काम वापस लेना पड़ा है। उनका कहना है कि अब उधमुपर के साथ डोडा और कठुआ का टेंडर भी खुद जारी करवाएंगे।
- डॉ. जोगेश्वर गुप्ता, चेयरमैन, नगर परिषद