संवाद न्यूज एजेंसी
कटड़ा। ब्लॉक पैंथल के धरती स्थित 06 बटालियन सीआरपीएफ ने मुख्यालय में 86वां स्थापना दिवस मनाया। इस दौराान कमांडेंट प्रदीप कुमार गिरी गोस्वामी एवं अधिकारियों व जवानों ने बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
अधिकारियों ने सीआरपीएफ के 85 वर्ष के इतिहास के बारे बताया। इसकी स्थापना 27 जुलाई 1939 को मध्यप्रदेश के शहर नीमच में हुई थी। इसके बाद सीआरपीएफ विश्व का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल बन गया। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का अतीत गौरवशाली रहा है और इसका वर्तमान काफी सशक्त है।
इसके गौरवशाली इतिहास में 9 अप्रैल का दिन भी शामिल हैं। इस दौरान 1965 को भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान सीआरपीएफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सैन्य इतिहास में सीआरपीएफ की एक छोटी सी टुकड़ी ने गुजरात के रन एवं कच्छ क्षेत्र में सरदार पोस्ट पर पाकिस्तान की पूरी ब्रिगेड के हमले को नाकाम कर दिया था। उस दिन को याद करते हुए सीआरपीएफ के उन बहादुरों की याद में नौ अप्रैल को शोर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।
21 अक्टूबर 1959 लद्दाख के हाट स्प्रिंग क्षेत्र में चीनी सैनिकों द्वारा घात लगाकर किए हमले में सीआरपीएफ के 10 जवानों ने बलिदान दिया था। उनकी याद में 21 अक्टूबर को पुलिस दिवस मनाया जाता है। उत्तरपूर्वी राज्य हो या जम्मू कश्मीर या नक्सल प्रभावित क्षेत्र हो, या फिर चुनाव ड्यूटी हो सीआरपीएफ आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही है। इसके अलावा 1987 में शांति सेना के रूप में सीआरपीएफ ने श्रीलंका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी तथा आज भी सीआरपीएफ सयुंक्त राष्ट्र मिशन के अंतर्गत हैती, कोसोवो, लाई बेरिया सहित कई देशों में अपनी सेवायें दे चुके हैं।
आज भी धर्मनगरी कटड़ा में स्थित 06 बटालियन सीआरपीएफ के जवान श्रीमाता वैष्णो देवी के दर्शन करने वाले यात्रियों की सुरक्षा में 24 घंटे तैनात रहते हैं और जरूरत पड़ने पर हर सम्भव मदद भी करते हैं। स्थापना दिवस पर अधिकारियों एवं जवानों ने धीरती में पौधरोपण अभियान भी चलाया।