भद्रवाह। कश्मीर की सबसे पुरानी हस्तशिल्प कलाओं में शुमार पेपर माची में इको फ्रेंडली नवाचार कर अनीजा मुश्ताक नजीर बन गई हैं। हस्तशिल्प से जुड़े लोग अनीजा के नवाचार को कला से छेड़छाड़ बताते रहे। 15 साल बाद अनीजा का स्टार्टअप पंजीकृत हुआ तो उसके साथ दूरदराज इलाकों की महिलाएं और छात्राओं का कारवां चल पड़ा। मार्च 2022 में शुरू हुए जम्मू पेपर माची स्टार्टअप के साथ सात माह में 200 महिलाएं जुड़ गई हैं। इनमें गृहिणियाें के साथ छात्राएं भी हैं।
35 वर्षीय अनीजा ने इसी साल मार्च माह में स्टार्टअप रजिस्टर करवाया था। अनीजा ने कहा, स्कूल के दिनों से ही पेपर माची में कुछ करने का सपना था। मैं इसे पूरी तरह से इको फ्रेंडली बनाना चाहती हूं। फिलहाल कृत्रिम रंगों की जगह इको फ्रेंडली रंग इस्तेमाल कर रही हूं, जिससे बने उत्पादों की अब अच्छी मांग है। अनीजा पेपर माची में अंडे व अखरोट के छिलके और कांच की बोतल का इस्तेमाल करती हैं, जबकि कश्मीर की पेपर माची में प्लास्टिक की सामग्री और कृत्रिम रंगों का प्रयोग होता है। नवाचार से जब बदलाव करने पर अनीजा से कहा गया कि इस हस्तशिल्प में बदलाव नहीं किया जा सकता। सभी उसे नाउम्मीद करते रहे। वर्ष 2007 से उसने संघर्ष जारी रखते हुए पेपर माची को नवाचार के साथ आगे बढ़ाना जारी रखा। आखिरकार शेरे कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेस एंड टेकभनोलॉजी जम्मू में प्रदर्शनी के दौरान उसे निदेशक स्टार्टअप ने सराहा। विश्वविद्यालय ने उसका स्टार्टअप जम्मू पेपर माची के नाम से पंजीकृत कर लिया। इसके बाद अनीजा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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सात माह में देश भर में
25 प्रदर्शनियों में हिस्सा
सात साल के बेटे की मां अनीजा मुश्ताक स्टार्टअप पंजीकृत होने बाद सात माह में 25 प्रदर्शनियों में शामिल हो चुकी हैं। अनीजा ने चंडीगढ़, दिल्ली, मुंबई, गोवा, सूरज कुंड, सेना के संगम महोत्सव में भी हिस्सा लिया है।
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प्रशिक्षु बोलीं - हमें नई पहचान मिली
किला मोहल्ले की रहने वाली 37 साल की रिजवाना बेगम ने कहा, मेरे दो बच्चे स्कूल पढ़ते हैं। इस कला ने हमें नई पहचान और आत्मविश्वास दिया है। वहीं, अनीजा की 29 वर्षीय प्रशिक्षु शालू देवी ने कहा, हमारे बनाए उत्पाद लोगाें को पसंद आ रहे हैं। अब हमारी पारिवारिक स्थिति में भी सुधार हो रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही हम पूरी तरह से वित्तीय आत्मनिर्भरता हासिल कर लेंगे।