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सही वक्त आने पर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा जरूर मिलेगा : फारूक

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कटड़ा। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला सोमवार को माता वैष्णो देवी के आधार शिविर कटड़ा से वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से श्रीनगर के लिए रवाना हुए। कहा कि सही वक्त आने पर जम्मू-कश्मीर को उसका राज्य का दर्जा जरूर मिलेगा।
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इस दौरान रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखने को मिले। डॉ. फारूक अब्दुल्ला के आगमन को लेकर स्टेशन परिसर में पहले से ही पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की गई थी।
कटड़ा रेलवे स्टेशन पर डॉ. फारूक अब्दुल्ला का संक्षिप्त ठहराव रहा। उन्होंने मीडिया से ज्यादा बातचीत नहीं की लेकिन पत्रकारों के सवालों पर उन्होंने जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे को लेकर एक अहम बयान जरूर दिया। डॉ. फारूक ने कहा कि सही वक्त आने पर जम्मू-कश्मीर को उसका राज्य का दर्जा जरूर मिलेगा। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज है और राज्य के दर्जे की बहाली को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं।
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डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने वंदे भारत एक्सप्रेस से यात्रा करते हुए रेलवे की इस आधुनिक सुविधा की भी सराहना की। हालांकि उन्होंने इस विषय पर विस्तार से कुछ नहीं कहा लेकिन इतना जरूर स्पष्ट किया कि कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों के बीच बेहतर रेल कनेक्टिविटी से आम लोगों को लाभ मिलेगा। वंदे भारत जैसी ट्रेनों के संचालन से यात्रा का समय कम होने के साथ-साथ पर्यटन और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई कार्यकर्ता और समर्थक स्टेशन के आसपास मौजूद दिखे, जिन्होंने दूर से ही अपने नेता का अभिवादन किया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक डॉ. फारूक अब्दुल्ला का यह दौरा संगठनात्मक और राजनीतिक बैठकों से जुड़ा हुआ है। इसमें आने वाले समय की रणनीति पर चर्चा की जा सकती है।
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही राज्य की बहाली एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। नेशनल कॉन्फ्रेंस लगातार यह मांग करती रही है कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिया जाए। डॉ. फारूक अब्दुल्ला इससे पहले भी कई मंचों से यह कह चुके हैं कि राज्य का दर्जा कोई भीख नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों का अधिकार है। कटड़ा से श्रीनगर की इस यात्रा के दौरान डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने जिस तरह से संक्षिप्त लेकिन भरोसे से भरा बयान दिया उसे राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। उनके इस बयान से पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में एक बार फिर उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक हालात में बदलाव देखने को मिल सकता है।
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