उधमपुर। रक्षाबंधन और जन्माष्टमी जैसे त्योहारों के नजदीक आते ही महंगाई का असर साफ दिखाई देने लगा है। खाद्य वस्तुओं के बढ़ते दामों ने जहां ग्राहकों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है, वहीं व्यापारी भी बढ़ती खरीद कीमतों से परेशान हैं। खासकर छोटे दुकानदारों के लिए लगातार बदलते दामों के बीच कारोबार चलाना चुनौती बनता जा रहा है।
चीनी के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। खुदरा बाजार में पहले करीब 55 रुपये प्रति किलो मिलने वाली चीनी अब करीब 75 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। वहीं थोक बाजार में चीनी पहले करीब 50 रुपये किलो मिलती थी, जिसकी कीमत अब बढ़कर करीब 68 रुपये किलो हो गई है। त्योहारों के दौरान घरों में मिठाइयां व पकवान बनाने के साथ-साथ हलवाई की दुकानों पर भी चीनी की मांग बढ़ जाती है। इसी तरह चावल की विभिन्न किस्म में करीब 10 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। 10 किलो के आटे के बैग की कीमत में भी करीब 30 से 40 रुपये की वृद्धि बताई जा रही है। थोक बाजार में 50 किलो का आटे का कट्टा, जो पहले करीब 1400 रुपये में मिलता था, लेकिन अब 1600 रुपये का हो गया है। खाद्य तेल के दाम में भी करीब 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि थोक कीमतों में लगातार बदलाव होने से छोटे दुकानदार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
त्योहारों में घर पर मिठाइयां और पकवान बनाने होते हैं। चीनी, तेल, आटा और चावल सभी महंगे हो गए हैं। ऐसे में इस बार त्योहार का बजट पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है।
- पंकज गुप्त, ग्राहक
महंगाई का असर हर रोज की खरीदारी पर पड़ रहा है। त्योहारों के समय खर्च पहले ही ज्यादा होता है लेकिन जरूरी सामान के दाम बढ़ने से आम परिवार के लिए बजट संभालना मुश्किल हो रहा है।
- आशीष कुमार, ग्राहक
थोक बाजार में कीमतें लगातार बदल रही हैं। हमें जिस कीमत पर सामान मिल रहा है, उसके हिसाब से ही आगे बेचना पड़ता है। छोटे दुकानदारों के लिए बढ़ती लागत के बीच कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है।
- कुलदीप गुप्ता, व्यापारी
लगातार बढ़ती कीमतों के कारण ग्राहकों को संतुष्ट करना मुश्किल हो गया है। ग्राहक दुकान पर आकर दाम पूछतें हैं और कीमत सुनने के बाद बिना सामान खरीदे वापस चले जाते हैं। ग्राहक दिन व दिन बदलते दामों को लेकर नाराज होते हैं।
- विजय कुमार, उपाध्यक्ष, व्यापार मंडल
पिछले कुछ दिनों से बाजार में कीमतें लगातार ऊपर-नीचे हो रही हैं। व्यापारी मंडल की ओर से आम तौर पर महीने के हिसाब से रेट लिस्ट तैयार की जाती है, लेकिन जिस तेजी से कीमतें बदल रही हैं, उससे दुकानदारों के लिए भी स्थिति मुश्किल हो रही है।
- जितेंद्र बरमानी, अध्यक्ष, व्यापार मंडल