चिनैनी। चिनैनी की रामलीला राजा महाराजाओं के जमाने से चली आ रही है। इसमें रामायण से जुड़े हर किरदार को दर्शाया जाता है, लेकिन 15 दिनों तक चलने वाली इस रामलीला के बीच में दशहरे वाले दिन रावण, मेघनाद व कुंभकरण के पुतले नहीं जलाए जाते। हालांकि क्षेत्र के कई युवाओं व लोगों को इसका मलाल जरूर रहता है, लेकिन 1990 में दशहरा महोत्सव के दौरान हुए एक हादसे के बाद से यह पर्व नहीं मनाया गया।
क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिक व रामलीला क्लब के पूर्व प्रधान अशोक गुप्ता, पूर्व खजांची गोविंद राम शर्मा ने बताया कि चिनैनी की रामलीला का आयोजन आजादी से पहले से ही हो रहा है। वर्ष 1990 में चिनैनी में भी दशहरा मनाने को लेकर स्थानीय लोगों ने रावण, मेघनाद व कुंभकरण के पुतले हायर सेकेंडरी स्कूल में जलने के लिए रखे थे। जैसे ही श्री राम के रूप में कलाकार ने अग्नि बाण चलाया तो कुछ ही देर बाद आतिशबाजी से वो घायल हो गया। इसी के चलते दशहरे वाले दिन रावण का पुतला नहीं जलाया जाता जबकि रामलीला मंचन के दौरान ही पूर्णिमा के दिन रावण का वध और श्री राम जी का राजतिलक किया जाता है।