भागवत कथा में मौजूद श्रद्धालु।
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उधमपुर। फंगयाल रठयान के रत्ना मोती फार्म में तीसरे दिन भी श्रीमद् देवी भागवत कथा जारी रही। कथावाचक सुभाष शास्त्री महाराज ने कहा कि जब से हमने होश संभाला है, हम केवल दूसरों के बारे में ही सोचते रहते हैं, जबकि हमें अपने संबंध में और अपनी वर्तमान वृत्तियों के बारे में विचार करना चाहिए। हमें यह बात अच्छी तरह जान लेनी चाहिए कि जब तक हम अपने को नहीं पहचान लेंगे तब तक किसी को ठीक से नहीं पहचान सकेंगे।
शास्त्री ने कहा कि अपने विषय में आप एकांत में बैठकर सोच विचार कर सकते हैं परंतु एकांत में एक बहुत बड़ी अड़चन आती है, वह है भूत अथवा भविष्य की चिंता। मैंने ये अच्छा किया, ये बुरा किया। जब मन में यह विचार उठें तो मन को समझा दें कि जो हो गया सो हो गया। अब भविष्य प्रभु के हाथों में है। आहिस्ता-आहिस्ता मन इससे मुक्त हो जाएगा और फिर पूरी एकाग्रता के साथ प्रयास कर आंतरिक यात्रा कर स्वयं को पहचानें।