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Udhampur News: निर्धारित समय अवधि के बाद याचिका दायर करने पर अदालत ने की खारिज

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उधमपुर। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत दावा याचिका के तहत दुर्घटना में चोट लगने पर मुआवजे की मांग की गई, लेकिन समय अवधि में देरी करने पर अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।
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जानकारी के अनुसार मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत सुरम चंद ने दायर एक दावा याचिका के माध्यम से 4 जुलाई 2022 को एक सड़क दुर्घटना में लगी चोटों के लिए मुआवजे की मांग की थी। दुर्घटना 4 जुलाई 2022 को हुई थी जबकि दावा याचिका 21 फरवरी, 2023 को दायर की गई। न्यायालय द्वारा निर्धारित मुद्दे पर चर्चा एवं विचार विमर्श किया जिसमें क्या याचिका समय-बाधित है और पोषणीय नहीं है। क्या दुर्घटना तेज और लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण हुई, जिससे याचिकाकर्ता को चोटें आईं। क्या दुर्घटना की तिथि पर चालक के पास वैध और प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। क्या दुर्घटना के समय वैध और प्रभावी आरसी, आरपी और एफसी के बिना वाहन चलाया जा रहा था। क्या याचिकाकर्ता किसी मुआवजे का हकदार है और यदि हां, तो किस हद तक और किससे।
प्रतिवादी ने तर्क दिया कि संशोधित मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार, याचिका को खारिज कर दिया जाना चाहिए क्योंकि यह दुर्घटना के छह महीने के भीतर दायर नहीं की गई थी। उन्होंने इस तर्क के समर्थन में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के निर्णयों का हवाला दिया।
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याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि धारा 166 (3) परिसीमा अधिनियम, 1963 की प्रयोज्यता को समाप्त नहीं करती है और परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 29 (2) के प्रावधान लागू होने चाहिए। याचिकाकर्ता ने इस तर्क के समर्थन में केरल उच्च न्यायालय के एक निर्णय का हवाला दिया।
न्यायालय ने निर्धारित किया कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 (3) दावा याचिका दायर करने के लिए छह महीने की परिसीमा अवधि निर्धारित है और इस अवधि को बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। दुर्घटना 4 जुलाई, 2022 को हुई थी और याचिका 21 फ़रवरी, 2023 को दायर की गई थी, जो छह महीने की परिसीमा अवधि के बाद है।
संशोधित मोटर वाहन अधिनियम 1 अप्रैल, 2022 को लागू हुआ, जिसका अर्थ है कि दुर्घटना संशोधन के बाद हुई थी और याचिका दुर्घटना के छह महीने के भीतर दायर की जानी चाहिए थी। न्यायालय ने दावा याचिका को समय-बाधित और विचारणीय न होने के कारण खारिज कर दिया।
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