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Udhampur News: अतिक्रमण की भेंट चढ़ी दूध गंगा, 6 किमी तक कब्जे

Sat, 17 Feb 2024 01:18 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
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अनदेखी का शिकार हुई दूध गंगा अतिक्रमण के बोझ तले दब हो रही लुप्तर
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संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। जिला प्रशासन मौजूदा समय में देविका नदी के दोनों तरफ से अतिक्रमण को हटा रहा है। अगर प्रशासन देविका के साथ बहने वाली दूध गंगा के लिए भी कदम उठाए तो शायद ही लोग इस सराहनीय कदम को जिंदगी भर भूल पाएंगे।
अनदेखी का शिकार हुई दूध गंगा धीरे-धीरे अतिक्रमण के बोझ तले लुप्त होती जा रही है। इतना ही लगभग 6 किलोमीटर दायरे में फैली दूध गंगा गंगेड़ा पहाड़ी से शुरू हुई मौजूदा समय में शहर के बीचोबीच अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई है। अवैध निर्माण के चलते कई जगह पर लुप्त हो गई है और सीधा देविका के पास आकर प्रकट होती है। हैरानी की बात तो यह है कि अतिक्रमणकारियों ने दूध गंगा के ऊपर ही होटल, व्यापारिक एवं निजी प्रतिष्ठानों सहित स्कूल, कॉलेज से निजी संपत्ति के दायरे में चारों ओर से घेर रखा है।
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दूध गंगा के दोनों ओर बनाई गई इमारतों की वजह से भी उसका दायर घटता जा रहा है। देविका की तरह दूध गंगा भी अपने अस्तित्व को खोते चले जा रही है। देविका नदी की पवित्रता उधमपुर में बहने वाली दूध गंगा के संगम से काफी बढ़ जाती है।
जिस स्थान पर दूध गंगा और देविका का संगम होता है उसी स्थान पर संस्कार करने की प्रथा सदियों से चल आ रही है। लोगों का कहना था कि देविका का प्राकृतिक स्वरूप वापस लौटाने के लिए दूध गंगा का भी संरक्षण एवं अतिक्रमण मुक्त होना काफी जरूरी है। मौजूदा समय में दूध गंगा जहां अतिक्रमणकारियों के चंगुल में फंसी है तो वहीं दूसरी ओर दूध गंगा में फैलाई जा रही गंदगी के कारण नाले में तबदील हो गई है। अनदेखी का शिकार होने से लोग इसकी पवित्रता को भूलते जा रहे हैं।
जिस तरह से प्रशासन की ओर से देविका को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए कार्रवाई की जा रही है, वह सराहनीय है। देविका के साथ साथ बहने वाली दूध गंगा पर भी अपनी ध्यान दिया जाता तो अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त हो सकती थी।
संजय शर्मा, स्थानीय निवासी

प्रशासन की ओर से जो देविका के लिए कार्रवाई की जा रही है व बेहद सराहनीय है। अगर प्रशासन यही कदम कुछ वर्ष पहले उठता तो शायद आज प्रशासन को इतनी मशक्कत न करनी पड़ती। प्रशासन की कार्रवाई उस समय पूरी होगी, जब दूध गंगा को भी अपना अस्तित्व मिलेगा।
जोगिंद्र, स्थानीय निवासी

इस समय देविका के पास दूध गंगा बह रही है। इसकी हालत इस कदर खराब है कि कचरे से भर गई है। जहां नगर परिषद की ओर से देविका की साफ-सफाई करवाई जा रही है तो इसी तरह दूध गंगा की भी साफ सफाई करवाई जाए। हम इसका इंतजार कर रहे हैं कि आखिर कब दूध गंगा भी अतिक्रमण कारियों के चंगुल से आजाद होगी।
दीक्षांत बुच्चा, स्थानीय निवासी

गेंगड़ा से निकली दूध गंगा देविका तक पहुंचते-पहुंचते कई जगह पर लुप्त हो गई है। इतना ही नहीं देविका के पास भी अतिक्रमणकारियों ने उस पर अपना कब्जा जमाया हुआ है। हम प्रशासन से यही मांग करते है कि जिस तरह से देविका को अतिक्रमण मुक्त करवाया जा रहा है उसी तरह से दूध गंगा से भी अतिक्रमण कारियों को हटाया जाए।
विकास खजुरिया, स्थानीय निवासी
जनता का सहयोग भी काफी जरूरी
किसी भी अभियान को सफल बनाने के लिए जनता के सहयोग की काफी जरूरत होती है। जिस तरह देविका के श्मशानघाट पर बने काफी पुराने पुल को असुरक्षित घोषित करने पर स्थानीय निवासी अशोक कुमार ने आगे आकर पुल के निर्माण में योगदान दिया है, वह सराहनीय है। उसी तरह अतिक्रमण विरोधी या अन्य समाज के हित से जुड़े कार्यों में लोगों को खुद आगे आना चाहिए।
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-जोगिंद्र सिंह जसरोटिया,
एडीसी उधमपुर।
देविका के बाद दूध गंंगा के लिए भी करेंगे प्रयास

देविका किनारे मौजूद अतिक्रमण का मुद्दा काफी पुराना चला आ रहा है। एनजीटी की गाइडलाइंस पर देविका किनारे 73 ढांचों का चयन किया गया है, जो देविका के अतिक्रमण के दायरे में आते हैं। लोगों के सहयोग से सभी को हटाया जा रहा है। इसके बाद अगले चरण में दूध गंगा के प्राकृतिक स्वरूप को भी वापस लौटाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए जनता से सहयोग की अपील की जाएगी। :सलोनी
राय, डीसी उधमपुर।
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