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Udhampur News: शहर में आवारा कुत्तों की भरमार 5 माह में 380 को बनाया शिकार

Mon, 15 Jan 2024 03:41 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उधमपुर
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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक रोजाना कुत्तों के काटने के 5 से ज्यादा केस पहुंच रहे अस्पताल
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संवाद न्यूज एजेंसी

उधमपुर। शहर में दिन व दिन बढ़ रही आवारा कुत्तों की संख्या शहरवासियों के लिए एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। आए दिन इन लावारिस कुत्तों के काटने से कई लोग अस्पताल पहुंच रहे है। पिछले पांच महीनों के भीतर अब तक तकरीबन 380 लोग इन लावारिस कुत्तों के काटने से अस्पताल पहुंचे हैं।

इनका उपचार डाक्टरों की ओर से किया गया है। शहर की गलियों व सड़कों पर आवारा कुत्ताें की संख्या बढ़ने के साथ ही शहर के डाग बाइट के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे लोग व परिजन इसके कारण काफी समस्या का सामना कर रहे हैं। इन आवारा कुत्तों के कारण शहरवासी रैबीज जैसी लाइलाज बीमारी का शिकार होने से भी डर रहे हैं। इसके चलते डाग बाइट के डर से रात को शहर की सुनसान गलियों में अकेले गुजरने से भी लोग कतरा रहे हैं।
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दिन की अपेक्षा रात के समय इन कुत्ताें के झुंड ज्यादा अक्रामक और सक्रिय हो जाते हैं । इससे हादसों का भी जोखिम बढ गया है। लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से इस परेशानी को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। इससे परेशानी बढ़ती जा रही है। शहर भर में कुत्तों की भरमार हो चुकी है। हर चौक-चौराहों व गलियों मोहल्लों में यह कुत्ते अपना झुंड बनाकर बैठे रहते है। रात के समय में अगर कोई अपने दोपहिया वाहन लेकर चलता है तो कुत्तों के झुंड उसके पीछे पड़ कर उस पर हमला करने की कोशिश करते है। पिछले पांच महीनों में शहर में लगभग 380 लोग आवारा कुत्तों द्वारा काटे जाने की समस्या झेल चुके हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक डाग बाइट के रोजाना 5 से 8 मरीज अस्पताल पहुंच रहे है।

एनिमल बर्थ कंट्रोल के तहत की जाएगी नसबंदी : नगर परिषद के सीईओ अमित शर्मा ने बताया कि आवारा कुत्तों की जनसंख्या को काबू करने का एकमात्र विकल्प रजिस्टर्ड विशेषज्ञ डाॅक्टरों की सहायता से एनिमल बर्थ कंट्रोल के तहत इनकी नसबंदी की जाएगी। मगर इस प्रक्रिया के लिए भी कुछ जरूरी औपचारिकताएं हैं। इन्हें पूरा किए बिना इस काम को अंजाम देना समस्या को कम करने की बजाय कुत्तों में सक्रंमण फैलने व अन्य कई समस्याओं का कारण बन सकता है। हालांकि कुछ समय पहले एनजीओ क्रूरता की रोकथाम के लिए सोसाइटी (एसपीसीए) के सहयोग से शहर में इस प्रक्रिया को शुरू किया गया था। मगर उधमपुर में कुत्तों की नसबंदी के बाद उन्हें देखभाल के लिए रखने के लिए कोई स्थान उपलब्ध नहीं होने के कारण इस काम को आगे नहीं बढ़ाया जा सका था। बहरहाल एसपीसीए के लिए शहर के नजदीक चक्खड़ इलाके में जगह का चयन किया गया है। सब कुछ ठीक रहा तो चयनित जगह पर इमारत तैयार कर इस प्रक्रिया को शुरू किया जा सकेगा।
शहर में बढ़ रही कुत्तों की संख्या चिंताजनक हैं। इसकी तत्काल रोकथाम जरूरी है। कुछ महीने पहले मुझे भी एक कुत्ते ने काटा था। असहनीय दर्द के साथ महंगे इलाज का भी खर्च उठाना पड़ा था ।

-राहुल, स्थानीय निवासी
दो महीने पहले ही रात को घर की तरफ लौटते समय घर के पास गली में आवारा कुत्ते ने काट दिया था। शोर सुनकर आसपास के लोगों ने बचा लिया, लेकिन फिर भी कुत्ते ने उनकी टांग पर काट लिया था।

जुगल किशोर गुप्ता, स्थानीय निवासी
भीड़भाड़ वाले इलाके में यह शांत रहते हैं, लेकिन सुनसान और अंधेरी गलियों व सड़कों पर यह किसी पर भी हमला कर देते हैं। कई बार घर की तरफ लौटते समय इनके हमले से बचते बचाते घर आना पड़ता है।

-सोहन लाल
डाॅग बाइट के कारण कई दिन काम पर नहीं जा सका। इससे असहनीय दर्द के ंसाथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। कई दिनों तक खाने पीने में कई चीजों का भी परहेज रखना पड़ा था। रैबीज का डर भी लगातार सताता रहा था।
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-जोगिंद्र कुमार
पिछले पांच महीनों में शहर में आवारा कुत्तों के काटने के 380 मामले सामने आए हैं। इसमें अस्पताल पहुंचे लोगों का उपचार किया गया है। अगर हम रोजाना कुत्ते काटने के मामले की बात करें तो 5 से 8 मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सभी रोगियों का उपचार किया जा रहा है, लेकिन जरूरी है कि कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने पर भी ध्यान दिया जाए।

-डॉ. संजय शर्मा, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट उधमपुर
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