उधमपुर। जिले में जहां इस वर्ष डेंगू के मामलों का नया रिकार्ड बन गया है, वहीं अब जिला अस्पताल में दो दिन से डेंगू के टेस्ट नहीं होने का आरोप लगाकर लोगों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि डेंगू के टेस्ट करने वाला कर्मचारी किसी कैंप में हिस्सा लेने के लिए रियासी गया है। लैब में मौजूद अन्य कर्मचारी केवल टेस्ट के लिए सैंपल ले रहे हैं और उनको रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इसके साथ कई लोग सैकड़ों रुपये खर्च कर बाहर निजी लैब से टेस्ट करवाने को मजबूर हैं। वहीं जिला अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
इस बार जिला उधमपुर में डेंगू ने कहर मचाया हुआ है। अभी तक लगातार मामले सामने आ रहे हैं। वहीं अब जिला अस्पताल में हालात यह बन गए हैं कि दो दिन से लोगों के डेंगू के टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं। जिला अस्पताल में अब भी हर रोज 20 से 30 लोग संदिग्ध बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं और ओपीडी में मौजूद डॉक्टर इनको डेंगू के टेस्ट के लिए लैब में भेज रहे हैं। लैब में मौजूद कर्मचारी इनके डेंगू के टेस्ट के लिए सैंपल तो ले रहे हैं लेकिन इनको डेंगू के टेस्ट की रिपोर्ट नहीं मिल रही है। कई लोगों ने तीन से चार दिन पहले भी डेंगू के टेस्ट करवाए थे, लेकिन इनको अभी तक रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट नहीं मिलने का पता लगाने का प्रयास किया तो सूत्रों से पता चला कि डेंगू के टेस्ट करने वाला कर्मचारी किसी कैंप में हिस्सा लेने के लिए रियासी गया है और उसके सोमवार को पहुंचने की संभावना है। इसी कारण टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं ओर सैंपल देने के बाद भी लोगों को रिपोर्ट नहीं मिल रही है।
नरेश कुमार, प्रीतम लाल और आकाश कुुमार ने बताया कि उनके परिवार के सदस्य कई दिनों से बीमार हैं। वे डॉक्टर के कहने पर शनिवार को डेंगू का टेस्ट करवाने लैब में गए तो कर्मचारियों ने सैंपल तो लिए लेकिन रिपोर्ट के लिए कुछ दिन इंतजार करने को कहा। कर्मचारियों ने बताया कि टेस्ट करने वाला कर्मचारी रियासी गया है और उसके आने के बाद ही टेस्ट होने के बाद रिपोर्ट मिल पाएगी।
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जिला अस्पताल में किए जाते हैं एलीजा और रैपिड टेस्ट
जिला अस्पताल में डेंगू के दो तरह के टेस्ट किए जा रहे हैं। पहला टेस्ट एलीजा है और इसकी रिपोर्ट तैयार होने में दो से तीन दिन लगते हैं। वहीं दूसरा टेस्ट रैपिड है। रैपिड टेस्ट की रिपोर्ट एक घंटे के अंदर मिल जाती है, लेकिन इसकी रिपोर्ट को 100 प्रतिशत सही नहीं माना जाता है।
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निजी लैब में डेंगू के टेस्ट के लिए खर्च करनी पड़ती है एक हजार से अधिक राशि
जिला अस्पताल में डेंगू टेस्ट नहीं होने पर लोगों को मजबूरन निजी लैब में भी टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। इसके लिए लोगों को एक हजार से अधिक की राशि खर्च करनी पड़ रही है। जब कोई डेंगू का शिकार पाया जाता है तो उसको पूरे परिवार का टेस्ट करवाने के लिए मोटी राशि खर्च करनी पड़ रही है।
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जिला अस्पताल में डेंगू के टेस्ट नहीं होने का आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है। जिला अस्पताल में सुचारु रूप से डेंगू के टेस्ट करने की प्रक्रिया चल रही है और किसी कर्मचारी को रियासी नहीं भेजा गया है।
-डॉ. संजय भट्ट, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट जिला अस्पताल