उधमपुर। अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत शनिवार को ओमाड़ा मोड़ पर स्थित जेके पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल में संगोष्ठी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इसमें आठवीं से दसवीं कक्षा तक की छात्राओं ने हिस्सा लेकर कहा कि लड़कियों और महिलाओं को अपनी ताकत का अहसास कराना होगा। लड़कियां किसी तरह से भी पुरुषों से कम नहीं है। उनको अपनी आत्मरक्षा के प्रति गंभीर होना पड़ेगा। इस अवसर पर स्कूल की मैनेजिंग डायरेक्टर कवल बावा मुख्य मेहमान रहीं।
प्रधानाचार्य मनिंद्र बावा के नेतृत्व में दोपहर करीब 12 बजे कार्यक्रम की शुरुआत हुई। बारी-बारी से स्कूल की सात छात्राओं ने अपनी बात को सबके सामने रखा। छात्राओं ने कहा कि घर, परिवार और समाज महिलाओं के बिना संभव नहीं है। महिलाओं के बिना समाज के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है। फिर भी सदियों से महिलाओं को बांध कर रखने का काम किया जा रहा है, लेकिन अब महिलाओं ने समाज को मानसिकता को बदलने के लिए मजबूर कर दिया है। महिलाओं को आत्म रक्षा के गुर सीखने होंगे। उनको समाज में अपने आप और भी मजबूर करने की जरूरत है।
संगोष्ठी प्रतियोगिता में पहला स्थान दसवीं की मुस्कान शर्मा ने हासिल किया। जबकि दसवीं की कनिष्का ने दूसरा स्थान हासिल किया। तीसरे स्थान पर आठवीं की रश्मी रही। लक्ष्मी देवी, पलक शर्मा, गरिमा और अंजली शर्मा ने सांत्वना पुरस्कार हासिल किया। छात्राओं को जागरूक करने के लिए अमर उजाला की तरफ से आयोजित कार्यक्रम की प्रधानाचार्य मनिंद्र सिंह बावा ने खूब प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आज के समय इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम की सख्त जरूरत है। छात्राओं को इससे मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम में मंच संचालन शिक्षिका ज्योति देवी ने किया। जज की भूमिका मुक्ता महाजन, रंजन शर्मा ने निभाई।
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महिलाओं को अपने अधिकार और जिम्मेदारी के प्रति जागरूक होना चाहिए। स्वस्थ समाज के लिए महिलाओं का शारीरिक, मानसिक रूप से निरोग होना बहुत जरूरी है। देश का विकास महिलाओं के साथ जुड़ा हुआ है।
-रश्मी
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आज महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर चल रही हैं। जहां पहले लड़कियों को जल्दी शादी करने के लिए मजबूर किया जाता था, वहीं आज लड़कियां बेहतर शिक्षा के बल पर आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं ने अपनी ताकत विश्व के सामने साबित कर दी है।
-लक्ष्मी
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अमर उजाला का अपराजिता अभियान सराहनीय है। आज भी महिलाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। अत्याचार करने के मामलों में वृद्धि हो रही है। महिलाओं को अपने आप को और भी मजबूत बनाने की जरूरत है।
-मुस्कान
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औरत का जितना सम्मान होगा, दुनिया उतनी ही खूबसूरत होगी। भारत के संविधान के अनुसार पुरुषों की तरह की सभी क्षेत्रों में महिलाओं को समानता प्रदान की गई है। इन अधिकारों को लेकर महिलाओं को जागरूक होना होगा।
-कनिष्का
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युवा पीढ़ी को महिलाओं के प्रति सोच को बदलने की जरूरत है। जिस परिवार में नारियां को सम्मान नहीं होता है, वहां कभी भी खुशी नहीं होती है। लेकिन जिस घर में नारी को सम्मान दिया जाता है, उस घर में हमेशा खुशहाली रहती है।
-पलक शर्मा
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महिलाओं को किसी को भी कमजोर कहने का अवसर नहीं देना चाहिए। आज की महिला लाचार नहीं है। उसने समाज में अपना अलग स्थल बना लिया है। महिलाओं के प्रति घर के अंदर पुरुषों को भी अपनी सोच में बदलाव करना होगा।
- गरिमा
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महिलाओं के प्रति लोगों का नजरिया बदल रहा है। लोगों को पता चल रहा है कि आज की महिला अबला नहीं है। वह एक मजबूत स्तंभ है। जब भी मुश्किल परिस्थितियां सामने आती है तो महिलाएं भी मजबूती के साथ उनका सामना कर रही हैं।
-अंजली शर्मा