उधमपुर। एक वर्ष और तीन महीने के इंतजार के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी ने दल बदल विरोधी कानून को लेकर अपना निर्णय सुनाते हुए पैंथर्स पार्टी के छह और कांग्रेस की एक पार्षद को जम्मू-कश्मीर म्युनिसिपल एक्ट के अंडर सेक्शन 18-सी के तहत कार्रवाई करते हुए अयोग्य घोषित कर दिया है। इसका लिखित आदेश शुक्रवार को जारी किया गया। इस आदेश के बाद नगर परिषद चेयरमैन डाॅ. जोगेश्वर गुप्ता दोबारा से अपने पद पर बैठ कर काम कर सकेंगे। इससे अब इन पार्षदों की तरफ से पेश किए अविश्वास प्रस्ताव और फ्लोर टेस्ट के परिणाम का भी कोई महत्व नहीं रह गया है।
अप्रैल 2022 में पैंथर्स पार्टी के वार्ड नंबर 2 पार्षद सुनील प्रोच, 3 के समनीक भसीन, 11 की आरती वर्मा, 17 की आशा देवी, 20 के जगदीश कुमार, 21 के दर्शन कुमार ने उधमपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया के साथ आम आदमी पार्टी का दामन थामा था। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी की पार्षद प्रीति खजूरिया भी आप में शामिल हुई थी। उधमपुर लौटने पर इन पार्षदों ने आप के कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर दिखाया कि वह चुनाव लड़ने के लिए चुनी गई पार्टी को छोड़ चुके हैं। मई 2022 में नगर परिषद चेयरमैन डा. जोगेश्वर गुप्ता ने दल बदल विरोधी कानून के तहत इसकी शिकायत मुख्य चुनाव अधिकारी के साथ की। इसको लेकर मुख्य चुनाव अधिकारी ने इन पार्षदों को नोटिस जारी किए, लेकिन इन्होंने इसको गंभीरता से नहीं लिया।
अगस्त 2022 में अचानक 11 पार्षदों ने नगर परिषद चेयरमैन डा. जोगेश्वर गुप्ता के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। इनमें 7 पार्षद वही थे जोकि अपनी पार्टी को छोड़ कर आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। अविश्वास प्रस्ताव के बाद मामला गर्माया और शहरवासियों को पता चला कि सात पार्षदों पर दल बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की तलवार लटक रही है। लेकिन इन पार्षदों ने फिर भी इसको गंभीरता से नहीं लिया। सितंबर में अविश्वास प्रस्ताव का फ्लोर टेस्ट हुआ और इसमें डाक्टर जोगेश्वर गुप्ता को समर्थन नहीं मिला। लेकिन इसका परिणाम निकलने से पहले ही डा. जोगेश्वर गुप्ता हाईकोर्ट से स्टे आर्डर लेकर आ गए। इससे विवाद और बढ़ गया और बागी पार्षदों की तरफ से कई आरोप लगाए गए। इसी बीच मुख्य चुनाव अधिकारी को ट्रांसफर कर दिल्ली भेज दिया गया और फिर कई महीनों तक पद खाली रहने के कारण इसको लेकर कोई सुनवाई नहीं हो सकी। दो महीने पहले हाई कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाते हुए आदेश जारी किया कि अविश्वास प्रस्ताव के फ्लोर टेस्ट का परिणाम घोषित किया जाए और मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय में दर्ज की गई शिकायत की सुनवाई के बाद चेयरमैन पद के चुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। एक वर्ष और तीन महीने के इंतजार के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी पीके पोले ने सातों पार्षदों को दल बदल विरोधी कानून के तहत दोषी पाया और सातों को नगर परिषद उधमपुर से अयोग्य घोषित कर दिया।
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कई वीडियो, फोटो, और अखबारों में छपी खबरों की कटिंग को बनाया सबूत
नगर परिषद चेयरमैन डा. जोगेश्वर गुप्ता ने मुख्य चुनाव अधिकारी के समक्ष सबूत के तौर पर इन पार्षदों के कई वीडियो, फोटो और अखबारों में छपी खबरों को सबूत के तौर पर पेश किया। हालांकि जब इसके बारे में इन पार्षदों से पूछा गया तो इनका कहना था कि पेश किए गए सबूत पूरी तरह से गलत हैं और खबरें भी गलत चलाई गई हैं। हालांकि मुख्य चुनाव अधिकारी ने पूछा कि अगर खबरें गलत थी तो इनका विरोध क्यों नहीं किया गया। इन्हीं के आधार मुख्य चुनाव अधिकारी ने पाया कि इन पार्षदों ने चुनाव लड़ने वाली पार्टी को छोड़ कर दूसरी पार्टी को चुना है।
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एक सप्ताह का जारी किया था नोटिस
डाॅ. जोगेश्वर गुप्ता ने बताया कि आप में शामिल होने के बाद जब यह सातों पार्षद कार्यालय में आए थे इनसे पूछा कि सभी ने दूसरी पार्टी को ज्वाइन कर लिया और हाउस का चेयरमैन होने के नाते आपको मुझे इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी। लेकिन इनकी तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया और सभी हंसने लगे। मैंने चेयरमैन होने के नाते इसका नोटिस जारी किया और जवाब मांगा। साथ ही सभी वीडियो और फोटो के साथ इसकी जानकारी मुख्य चुनाव अधिकारी को उपलब्ध करवाई। इसके बाद इन पार्षदों ने बदला लेने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। आज के निर्णय से साफ हो गया कि जीत हमेशा सच की होती है।
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सभी 7 पार्षद मिलकर हाईकोर्ट में इस निर्णय को चुनौती देंगे। मुख्य चुनाव अधिकारी ने एक तरफा निर्णय सुनाया है। कठुआ जिले में कांग्रेस के पांच पार्षद पार्टी छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए थे तो फिर उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। हमने तो अपनी पार्टी को छोड़ा ही नहीं था। यह सब भाजपा के इशारे पर किया गया है। जनता के लिए आवाज उठाने के लिए निशाना बनाया गया है।
-सुनील प्रोच, पार्षद वार्ड नंबर 2