श्रीनगर। गांदरबल की सत्र अदालत ने अपहरण और हत्या के 23 साल पुराने बहुचर्चित मामले में शुक्रवार को दो आरोपियों को बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश फौजिया पॉल की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। यह पूरा मामला 21 जून 1997 को बदरगुंड निवासी गुलाम नबी मलिक के कथित अपहरण और उसके बाद 16 अगस्त 1997 को गांदरबल पावर कैनाल से उनका क्षत-विक्षत शव बरामद होने से जुड़ा था। अभियोजन पक्ष का दावा था कि आरोपी परिवार की एक लड़की के साथ कथित अभद्र व्यवहार के चलते दोनों पक्षों में पुरानी रंजिश बन गई थी। इसके बाद मलिक का अपहरण और हत्या की गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, किसी भी आरोपी को केवल अटकलों, सुनी-सुनाई बातों या पुरानी रंजिश के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने जीवित आरोपी इरशाद अहमद सोफी और मोहम्मद यासीन सोफी को अपहरण, हत्या और साजिश के तमाम आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने मृतक की विधवा और अन्य आश्रितों को पीड़ित मुआवजा योजना के तहत राहत देने की सिफारिश की है। संवाद