लद्दाख में तैनात सुरक्षाबल। (फाइल फोटो)
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लेह में वायुसेना स्टेशन से करीब 50 किलोमीटर दूर स्पितुक क्षेत्र में के रडार और आवासीय परिसर की सुरक्षा बढ़ेगी। यहां इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगेगी। इसके लिए 2624 फीट लंबा सुरक्षा घेरा बनाया जाएगा। आठ फीट ऊंची इस बाड़ का उद्देश्य परिसर की निगरानी को मजबूत करना और अनधिकृत प्रवेश को रोकना है। इस फेंसिंग की खासियत इसका छेड़छाड़ पहचानने वाला सिस्टम है।
इसमें सुरक्षा घेरे को अधिकतम 100 मीटर के अलग-अलग निगरानी क्षेत्रों में बांटा जाएगा। तार काटने, तारों को आपस में जोड़ने या अर्थ कनेक्शन से छेड़छाड़ होने पर अलार्म बजेगी। इसके साथ चार मेगापिक्सल के कैमरे, इन्फ्रारेड सुविधा, सुरक्षा लाइटें और सायरन लगाए जाएंगे। कैमरों की रिकॉर्डिंग 45 दिन तक सुरक्षित रखी जा सकेगी। गेट पर सेंसर भी लगाए जाएंगे, ताकि उसकी स्थिति पर नजर रखी जा सके। लद्दाख के कठिन मौसम को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा प्रणाली को माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में काम करने योग्य बनाया जाएगा।
पथरीली जमीन में अर्थिंग बेहतर रखने के लिए बेंटोनाइट आधारित विशेष कंपाउंड का इस्तेमाल होगा। रडार और आवासीय परिसर की सुरक्षा के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। यहां कंप्यूटर, सर्वर और संचार उपकरण लगाए जाएंगे। बाड़ के तारों से छेड़छाड़ होने पर मिलने वाले अलर्ट और कैमरों की निगरानी इसी व्यवस्था से की जाएगा। इलेक्ट्रिक फेंसिंग परियोजना में उपकरण चीन से नहीं होना चाहिए। भारतीय वायुसेना ने इस परियोजना के लिए जेम पोर्टल पर निविदा जारी की है।