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गुरेज सेक्टर में 20 साल बाद सर्दियों में तैनात रहेंगे आठ स्त्री रोग विशेषज्ञ

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श्रीनगर। उत्तरी कश्मीर के सीमांत जिले बांदीपोरा में एलओसी के करीब गुरेज सेक्टर में करीब 20 साल बाद सर्दियों में आठ स्त्री रोग विशेषज्ञ तैनात रहेंगे। ये डॉक्टर गुरेज के सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल में काम करेंगे। इससे वहां के लोगों खासकर गर्भवती महिलाओं को काफी सहूलियत मिलेगी। लोगों के मुताबिक समय पर इलाज मिलने से कई जानें बच पाएंगी।
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बांदीपोरा जिले का एलओसी से सटा गुरेज सेक्टर एक बड़ी तहसील है। इसमें करीब 28 गांव हैं। यहां की आबादी 48630 है जिसमें से 18500 से अधिक महिलाएं हैं। यह इलाका सर्दियों के दौरान भीषण बर्फबारी के कारण जिला मुख्यालय कुपवाड़ा से करीब पांच महीने से अधिक समय के लिए कट जाता है। इसके चलते वहां के लोगों को स्वास्थ्य संबंधित काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
निदेशक स्वास्थ्य सेवा कश्मीर ने आठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों को यहां तैनात रहने का आदेश दिया है। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मरीजों की देखभाल के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञों को बांदीपोरा के गुरेज में 15 नवंबर से 14 मार्च 2023 तक के लिए तैनात किया गया है। इनमें डॉ. परवेज अहमद (सलाहकार स्त्री रोग विशेषज्ञ - ब्लॉक क्रालपोरा कुपवाड़ा), डॉ. अब्दुल वाहिद (चिकित्सा अधिकारी डीजीओ - ब्लॉक सोपोर), डॉ. मोहम्मद अफजल खान (सलाहकार स्त्री रोग विशेषज्ञ - ब्लॉक शीरी), डॉ. मोहम्मद अशरफ डार (चिकित्सा अधिकारी, एमडी -ब्लॉक सोगम कुपवाड़ा), डॉ. मोहम्मद यूसुफ (सलाहकार स्त्री रोग विशेषज्ञ-डीएच हंदवाड़ा), डॉ. आमिर इकबाल लोन (चिकित्सा अधिकारी, डीएनबी-ब्लॉक कुपवाड़ा) शामिल हैं।
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स्थानीय निवासी इनायतुल्ला ने बताया कि आज से दो साल पहले उसके छोटे भाई की बीवी ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया था। बीमारी की हालत में उसे बांदीपोरा के जिला अस्पताल ले जाया जा रहा था। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों के अभाव के चलते मरीजों को खासकर गर्भवती महिलाओं को जिला हेडक्वार्टर शिफ्ट किया जाता था लेकिन बर्फबारी के चलते रास्ता बंद होने के कारण कई मरीजों की मौत रास्ते में ही हो जाती थी। कइयों गर्भवतियों ने तो रास्ते में ही बच्चों को जन्म दिया।
इस बीच सकीना ने बताया कि इससे महिलाओं को काफी लाभ पहुंचेगा। गर्भवती महिलाओं को सही समय पर इलाज मिल पाएगा। सकीना ने बताया कि इमरजेंसी होने पर सर्दियों में सेना हेलिकॉप्टर में एयरलिफ्ट करती है, लेकिन अब यहां डॉक्टरों की तैनाती से कइयों की जान बच पाएगी।
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