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‘सही रास्ता’ कार्यक्रम युवाओं को कट्टरता के मार्ग पर जाने से रोकता है

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बारामुला। सेना और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कश्मीर के युवाओं को कट्टरता के रास्ते पर जाने से रोकने के लिए नागरिक सैन्य कार्यक्रम ‘सही रास्ता’ शुरू किया है। इसमें भाग लेने वाले युवाओं के रवैये में काफी बदलाव आया है।
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एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा कि एक साल पहले इस पहल की शुरुआत के बाद से अब तक 130 युवाओं ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया है। इससे युवाओ में मनोवैज्ञानिक प्रभाव और रवैये में बदलाव देखा गया है। ‘सही रास्ता’ पहल के तहत उन युवाओं की पहचान की जाती है, जो या तो कट्टरपंथी हो गए हैं या उस रास्ते पर जा रहे हैं। उन्हें 21 दिनों के आवासीय कार्यक्रम के माध्यम से मुख्यधारा में जोड़ा जाता है, जिसके दौरान विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ और सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी उनसे बातचीत करते हैं। सूत्रों ने कहा कि इस पहल के तहत 16-25 वर्ष की आयु के युवाओं के छह बैच में से अधिकतर उत्तरी कश्मीर से हैं, वे सभी ‘सही रास्ता’ कार्यक्रम से गुजरे हैं।
सेना के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस कार्यक्रम के लिए एक बहुत ही ‘अनुभवी मनोवैज्ञानिक’ टीम भी शामिल है। इसके अलावा शिक्षा, खेल और उद्योग जैसे विभिन्न क्षेत्रों के कई विशेषज्ञ इन युवाओं से मिलने जाते हैं और कार्यक्रम के दौरान उनसे बातचीत करते हैं। उन्होंने कहा, ‘अब इन सभी युवाओं में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, हमें उम्मीद है कि इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाएगा।’ सूत्रों ने कहा कि इन युवाओं की पहचान जम्मू कश्मीर पुलिस, सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य लोगों से मिली जानकारी के आधार पर की जाती है और उनके माता-पिता या परिवार के अभिभावकों की सहमति के बाद वे कार्यक्रम में शामिल होते हैं और अंत में उन्हें सुरक्षित रूप से अपने घरों के लिए वापस भेज दिया जाता है।
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श्रीनगर स्थित काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स (किलो) के एक शीर्ष सैन्य अधिकारी ने कहा कि सलाहकारों में नेता, मौलवी, पुलिस अधिकारी और अन्य शामिल हैं, जो इन युवाओं के साथ संवाद करते हैं। पहल के कार्यक्रम प्रबंधक मेहराज मलिक ने कहा कि जब हमने प्रतिभागियों से पूछा कि उन्होंने भटकाव का रास्ता क्यों चुना, तो उन्होंने हमें बताया कि यह अकसर धर्म के कारण होता है। आतंकवादियों, नापाक मंसूबे वालों और ओजीडब्ल्यू (आतंकियों के मददगार) का गठजोड़ ऐसे युवाओं को कट्टरपंथ के लिए प्रेरित करता है जो या तो बहुत कमजोर होते हैं या जीवन में निराश होते हैं। उन्होंने कहा‘‘कार्यक्त्रस्म के दौरान, हम प्रतिभागियों को सही रास्ता दिखाते हैं। मलिक ने कहा कि मुख्य रूप से बारामूला में हैदरबेग क्षेत्र में सेना अड्डे पर यह कार्यक्त्रस्म आयोजित होता है।
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