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कश्मीर में परिसीमन आयोग से मिले 169 प्रतिनिधिमंडल, 38 ने कोई बदलाव न करने पर जताई सहमति

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श्रीनगर। डल झील के किनारे स्थित शेर ए कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में परिसीमन आयोग की टीम से मंगलवार को राजनीतिक दलों, पंचायती राज संस्थानों के सदस्यों व अन्य लोगों ने मुलाकात कर अपने मुद्दे उठाए। परिसीमन आयोग से मिले 169 प्रतिनिधिमंडलों में से 38 ने कोई बदलाव नहीं करने पर सहमति जताई । जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी ने कुछ ऐतिहासिक स्थलों के पुराने नाम वापस करने और श्रीनगर शहर को दो निर्वाचन क्षेत्रों में बांटने की मांग रखी। इसके अलावा बडगाम और बीरवाह निर्वाचन क्षेत्र को बारामुला संसदीय क्षेत्र के साथ जोड़ने पर आपत्ति जताई। वहीं, बडगाम की सिविल सोसायटी ने हलका गुडसुथरा ए और बी को चरार ए शरीफ के साथ जोड़ने के बजाय चाडूरा के साथ जोड़ने का अनुरोध किया।
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जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के राज्य सचिव मुन्तजिर मोहियुद्दीन ने कहा कि आयोग के समक्ष कई क्षेत्रों को दूरदराज के हलकों से जोड़ने पर आपत्ति जताई और इन पर फिर से विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बडगाम जो श्रीनगर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा था, लेकिन बडगाम और बीरवाह निर्वाचन क्षेत्र को बारामुला संसदीय क्षेत्र के साथ जोड़ दिया गया है। हमने इस मुद्दे को उठाया। हब्बाकदल, जड़ीबल, अमीराकदल, बटमालू हमारे ऐतिहासिक नाम हैं और सूफी संतों के नाम से जुड़े हुए हैं। हमने आयोग से इनके पुराने नाम वापस रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि श्रीनगर शहर की आबादी बहुत ज़्यादा है इसलिए इसे दो निर्वाचन क्षेत्रों में बांटा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके मुद्दों पर आयोग का रुख सकारात्मक था। उम्मीद है कि इन पर गौर किया जाएगा।
वहीं कुपवाड़ा से आयोग से मिलने पहुंचे हाजी अली मोहम्मद आखून ने कहा कि जो मसौदा प्रस्ताव आयोग ने पेश किया है हम उससे संतुष्ट हैं, लेकिन जो थोड़ा बहुत बदलाव उसमें करना है, हमने उसे लेकर आयोग के सदस्यों से चर्चा की है। कुपवाड़ा जिले के गुची इलाके के सरपंच मोहम्मद सिराज भट ने कहा कि आयोग की टीम से सकारात्मक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने कहा था कि गुची, पाजीपोरा, दिदकूट, मुगलपोरा, नगरी, बुबरनाग को त्रेहकाम निर्वाचन क्षेत्र के साथ जोड़ा जाए लेकिन हम कुपवाड़ा के साथ हैं और चाहते हैं कि जो आयोग ने पहले जो मसौदा प्रस्ताव में रखा है, वैसा ही रखा जाए।
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बडगाम के सिविल सोसायटी के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उन्हें अपने मुद्दों पर आयोग से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। बडगाम के गुलाम मोहम्मद मीर ने कहा कि वो हलका गुडसुथरा ए और बी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। आयोग द्वारा हलके को चरार ए शरीफ के साथ जोड़ा गया है, लेकिन हम चाडूरा निर्वाचन क्षेत्र के करीब हैं, इसलिए हमने उनसे चरार ए शरीफ के बजाय चाडूरा के साथ जोड़ने का अनुरोध किया। वहीं जम्मू-कश्मीर पहाड़ी कल्चर एंड फोरम के प्रवक्ता और पूर्व एमएलसी सैयद रफीक शाह ने भी आयोग से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि आयोग सही दिशा में काम कर रहा है।
सुबह 10 से 2.30 बजे तक दो चरणों में हुई बैठक
श्रीनगर की डल झील के किनारे स्थित शेर ए कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई वाली आयोग की टीम ने आपत्तियों और सुझावों पर जन सुनवाई की। आयोग ने दो बैठकों में प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक श्रीनगर, बडगाम, अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा और शोपियां के लोगों ने आयोग से मुलाकात की। दूसरी बैठक दोपहर 12.30 बजे से 2.30 बजे तक चली। इसमें गांदरबल, बांदीपोरा, कुपवाड़ा और बारामुला के लोगों ने हिस्सा लिया।
आपत्तियां जताने पहुंचे कुछ लोगों को अंदर नहीं जाने दिया
इस बीच कुछ लोग आयोग के समक्ष आपत्तियां जताने पहुंचे, लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। जिस पर उन्होंने निराशा जताई। श्रीनगर लसजन से पहुंचे फयाज अहमद मीर ने कहा कि उन्हें कल डीसी ऑफिस से किसी अधिकारी ने फोन करके आयोग से एसकेआईसीसी में मुलाकात करने के लिए बुलाया, लेकिन आज मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि हमारा मुद्दा था कि हमारे इलाके को सोनवार निर्वाचन क्षेत्र के बजाए चाडूरा के साथ ही रखा जाए, जैसे कि पहले था। कुलगाम से पहुंचे गुलाम मोहम्मद डार ने कहा कि उनका इलाका जो कुलगाम निर्वाचन क्षेत्र के साथ था, उसे देवसर के साथ मिलाया गया है, जोकि नाइंसाफी है। उन्होंने कहा कि डीसी कुलगाम की तरफ से उन्हें पत्र मिला था, लेकिन उसके बावजूद भी नहीं मिलने दिया गया। पुलवामा के लित्तर इलाके के सरपंच अली मोहम्मद ने कहा उन्हें बैठक के लिए बुलाया गया था, लेकिन अंदर नहीं जाने दिया गया। उन्होंने कहा-आयोग वही करता है, जो उन्हें अच्छा लगता है, यह सिर्फ औपचारिकता है।
नेकां-पीडीपी ने कहा-न्यौता नहीं मिला तो कैसे जाते
इस बीच नेकां और पीडीपी के सूत्रों से बात करने पर पता चला कि आज केवल उन लोगों को बुलाया गया था जिन्होंने पहले अपने सुझाव या आपत्तियां दर्ज करवाई थीं, जिन्हे जिले के डीसी द्वारा न्यौता भेजा गया था, वही आयोग से मिलने गए थे। उन्होंने कहा कि उन्हें जब न्यौता नहीं मिला तो वह कैसे जाते।
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