हिजबुल मुजाहिद्दीन के एरिया कमांडर को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। न्यायाधीश अली मोहम्मद मागरे और मोहम्मद अकरम की खंडपीठ ने आतंकी फारूक अहमद की अर्जी पर सुनवाई की। वर्ष 2002 में भद्रवाह के रहने वाले फारूक अहमद ने अब्दुल क्यूम नाम के व्यक्ति की आतंक फैलाने के मकसद से हत्या कर दी थी।
बाद में यह आतंकी पकड़ा गया। इसके बाद निचली अदालत ने आतंकी को उम्रकैद की सजा सुनाई। इस फैसले को आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर सोमवार को सुनवाई की गई।
खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस मामले में और भी आरोपी थे, जिनको सजा सुनाए जाने से पहले ही उनकी मौत हो गई। ऐसे में अब अकेला आरोपी ही बचा है जो अपराध में शामिल था। उक्त दलीलों के साथ आरोपी को सुनाई गई सजा बरकरार रखी गई।