बडगाम बाजार में धार्मिक और सियासी नारे गूंज रहे हैं। यहां चुनावी मौसम में उत्साह का माहौल है। जगह-जगह लाल और हरी झंडियां लहरा रही हैं। थोड़ी ही देर में नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के उपाध्यक्ष और यहां से उम्मीदवार उमर अब्दुल्ला बाजार के पार्क में होने वाले जलसे में पहुंचने वाले हैं। खिली धूप के बीच एक छोटे गश्ती दस्ते ने उत्सुकता के साथ जुटी भीड़ की सुरक्षा पर पैनी नजर बना रखी है।
इस बीच सड़क से पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के झंडों से सजी गाड़ियां लाउडस्पीकर से प्रचार करते हुए गुजरीं तो किनारे खड़े लोगों ने हाथ उठाकर उनका भी इस्तकबाल किया। बडगाम सीट पर इस बार लड़ाई बेहद कांटे की है। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की राह मुश्किल करने के लिए पीडीपी ने इलाके में मजबूत पकड़ रखने वाले शिया धर्मगुरु और हुर्रियत नेता आगा सैयद हसन मोसावी के बेटे आगा सैयद मुंतजिर को मैदान में उतारा है।
शिया बहुल बडगाम इलाके में एनसी और पीडीपी की लड़ाई में दो धर्मगुरु भी आमने-सामने हैं। एनसी सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी इलाके में अच्छी पकड़ रखते हैं। उमर अब्दुल्ला की चुनावी रणनीति उनकी कोठी से ही संचालित हो रही है। बाजार से थोड़ी दूर स्थित कोठी के बाहर खड़े युवा आसिफ पहले तो कुछ बोलने को तैयार नहीं हुए, मगर कुरेदने पर कहते हैं कि इस बार की लड़ाई थोड़ी कठिन है।
युवाओं को रोजगार व क्षेत्र के विकास की चिंता है। हमारा फैसला भी इन्हीं मुद्दों पर निर्भर होगा। आरटीओ ऑफिस के पास बुजुर्ग बशीर अहमद कहते हैं कि मुंतजिर की बडगाम के शिया इलाकों में अच्छी पकड़ है और वह अब्दुल्ला को चौंकाने की पूरी क्षमता रखते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि 25 सितंबर को होने वाले दूसरे चरण के चुनाव में बडगाम सीट पर दिलचस्प चुनावी मुकाबला देखने को मिल सकता है।
लड़ाई में न होकर भी मुद्दा है भाजपा
बडगाम सीट पर भले ही भाजपा ने प्रत्याशी नहीं उतारा है। मगर, एनसी व पीडीपी की लड़ाई में भाजपा को ही हथियार बनाया जा रहा है। एनसी कार्यकर्ता गुल मोहम्मद कहते हैं, पिछली बार महबूबा मुफ्ती ने भाजपा के साथ सरकार बनाई थी। उनका भाजपा प्रेम जगजाहिर है। हम इस बात को लेकर जनता के बीच हैं। अगर, पीडीपी को मौका मिला तो वह फिर भाजपा के साथ हाथ मिलाएंगी और तब कश्मीर का क्या होगा, यह सब जानते हैं। पीडीपी समर्थक बिलाल अहमद का कहना है कि भाजपा की बी टीम का चेहरा पब्लिक के सामने आने लगा है। अपनी पार्टी ने उमर अब्दुल्ला का समर्थन गांदरबल में क्यों किया, यह सब जान चुके हैं।
एनसी का गढ़ है बडगाम
बडगाम सीट पर 1972 के चुनाव को छोड़कर, 1977 से ही एनसी ने मजबूत पकड़ बना रखी है। सैयद गुलाम हुसैन गिलानी और आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी जैसे एनसी नेताओं ने इस सीट पर सात बार जीत हासिल की है। चार बार के विजेता गिलानी ने 1977, 1983, 1987 व 1996 के चुनावों में प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों को हराया। वहीं, आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने 2002, 2008 व 2014 में लगातार तीन बार यह सीट जीती। लोकसभा चुनाव में बारामुला सीट पर इंजीनियर रशीद से दो लाख से भी ज्यादा वोटों से मिली हार के बाद भी उमर अब्दुल्ला बडगाम से आगे रहे थे।