श्रीनगर (ब्यूरो)। करबला की शहादत की याद में मनाए जाने वाले गर्मी के पर्व मोहर्रम के चालीसवें दिन चेहल्लुम पर शिया आबादी वाले इलाकों में मातमी जुलूस निकाले गए। अंजुमनों ने मातम कर शहीदाने करबला को याद किया। चेहल्लुम पर ताबूत, अलम के जुलूस निकले तो लोगों ने लंगर कर करबला की याद ताजा की। मोहर्रम के चालीस दिन पूरे होने पर चेहल्लुम मनाया जाता है। मंगलवार को श्रीनगर के हब्बा कदल, रैनावारी, बडगाम में मातमी जुलूस निकले तो शोपियां, सोपोर और बारामूला में भी शिया समुदाय के लोगों ने मातम मजलिस कर करबला की शहादत को याद किया। चेहल्लुम पर सुन्नी समुदाय के लोगों ने भी घरों में फातेहा कराकर लंगर किया। करबला की जंग में हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथी शहीद हो गए थे। उसी शहादत की याद में मोहर्रम और चेहल्लुम मनाया जाता है। ं