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Rajouri News: धर्म एक रहस्य है<bha>;</bha> संवेदना है, संवाद है और आत्मा की है खोज

Tue, 11 Apr 2023 02:04 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, राजौरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सुंदरबनी। धर्म मूल स्वभाव की खोज है। धर्म एक रहस्य है संवेदना है, संवाद है और आत्मा की खोज है। धर्म स्वयं की खोज का नाम है। जब भी हम धर्म कहते हैं तो यह ध्वनीत होता है कि कुछ है जिसे जानना जरूरी है। कोई शक्ति है या कोई रहस्य है। यह ज्ञान परम पूज्य आचार्य राजगुरु महामंडलेश्वर व श्री स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती जी महाराज ने ज्ञान गंग मठ में आयोजित विराट महामंडलेश्वर सम्मेलन के दूसरे दिन धर्म के सही स्वरूप की व्याख्या करते हुए दिया है।
उन्होने बताया कि धर्म है अनंत और अज्ञात में छलांग लगाना। धर्म है जन्म, मृत्यु और जीवन को जानना। हिन्दू संप्रदाय में धर्म को जीवन को धारण करने, समझने और परिष्कृत करने की विधि बताया गया है। धर्म को परिभाषित करना उतना ही कठिन है जितना ईश्वर को। दुनिया के तमाम विचारकों ने -जिन्होंने धर्म पर विचार किया है, अलग-अलग परिभाषाएं दी हैं। धर्म का सामान्य अर्थ कर्तव्य है। इसीलिए व्यक्ति के जीवन से संबंधित अनेक आचरणों की एक संहिता है जो उसके कर्तव्यों और व्यवहारों को नियंत्रित और निर्देशित करती है। उसका मार्ग-दर्शन करती है जिससे कि वह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके।
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विराट महामंडलेश्वर सम्मेलन दोपहर बादत तीन बजे से देर शाम आठ बजे तक हुआ। इस महान सम्मेलन को पूज्य स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती महाराज के उद्बोधन के बाद विश्राम दिया गया। ज्ञान गंगा मठ के प्रबंध निदेशक अशोक शर्मा ने बताया कि मंगलवार को सम्मेलन में ज्ञान पर परिचर्चा होगी। सोमवार को सम्मेलन में जम्मू-पुंछ संसदीय क्षेत्र के सांसद जुगल किशोर शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैणा, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंद्र शर्मा, बीडीसी चेयरमैन सुंदरबनी अरुण कुमार शर्मा आदि मौजूद रहे।
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इन संतों ने संगत को किया निहाल
आचार्य महामण्डलेश्वर राजगुरू स्वामी श्री विशोकानंद भारती महाराज जी (बीकानेर), श्री महंत निर्मल अखाड़ा स्वामी श्री ज्ञान देव सिंह (पंजाब), पूर्व निरंजनीपीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी पुण्यानंद गिरी महाराज (दिल्ली), महामंडलेश्वर स्वामी श्री आनंद चैतन्य महाराज (हरिद्वार), महामंडलेश्वर स्वामी श्री देवेन्द्रानन्द गिरी (राजौरी), महामंडलेश्वर स्वामी श्री चिदम्बरानन्द सरस्वती (मुम्बई), महामंडलेश्वर स्वामी श्री विश्वेश्वरानन्द (रोहतक), महामंडलेश्वर स्वामी श्री आशुतोषानन्द (वाराणसी), महामंडलेश्वर स्वामी श्री श्याम चैतन्य (वृन्दावन), महामंडलेश्वर श्री स्वामी अक्षरा नन्द गिरि (जम्मू), महामंडलेश्वर स्वामी श्री शिव चैतन्य (अंबाला), महंत श्री विष्णु मिरी महाराज (महाराष्ट्र), प्रमुख रूप से उपस्थित रहे और उपरोक्त सभी महान विभूतियों द्वारा धर्म के सही-सही स्वरूप की अनेकों प्रकार से व्याख्या की गई।
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