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मन की चिकित्सा के लिए सत्संग भवन ही चिकित्सालय : स्वामी परमानंद गिरि

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नौनाथ अखंड परमधाम आश्रम में सत्संग का हुआ आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। जिले के नौनाथ अखंड परमधाम आश्रम में सत्संग का आयोजन हुआ, जिसमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ स्थल के प्रमुख स्थायी सदस्य स्वामी परमानंद गिरि महाराज ने संगत पर अपने दिव्य प्रवचनों की वर्षा की। उन्होंने कहा कि जैसे शरीर के रोग के इलाज के लिए अस्पताल चाहिए, ऐसे ही मानसिक रोग के लिए सत्संग भवन ही चिकित्सालय है।
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कहा कि हम जयकारे लगाते हैं श्रीराम जन्म भूमि की जय हो, श्रीकृष्ण जन्म भूमि की जय हो। लेकिन, शिव की भूमि नहीं है। उनका जन्म नहीं हुआ है। फिर भी पार्वती जब-जब जन्म लेती हैं, शिव से ही ब्याह करती हैं। नारद जी ने उन्हें बहुत समझाया। भगवान विष्णु को बड़ा बता कर उनकी महिमा बताई। तब भी पार्वती ने हर बार यही कहा कि वह बिना ब्याह के रह लेंगी, लेकिन जब भी करेंगी तो शंकर से ही ब्याह करेंगी। यह है उनकी निष्ठा। उनकी जैसी ही निष्ठा होनी चाहिए। वह चाहे पति की निष्ठा हो, चाहे गुरु की निष्ठा हो या भगवान की निष्ठा हो। निष्ठा पक्की होनी चाहिए। वहीं कृष्ण हैं, वही राम, वही जानकी, वही राधा। जिसको मानते हो, उसे पक्का मान कर रोज भजन करें। पर पूर्णतया के बाद वही कृष्ण, वही राम हैं, इस भ्रम से ऊपर उठना है। इससे पहले स्वामी परमानंद गिरि का जम्मू-कश्मीर के प्रवेश द्वार लखनपुर में प्रवेश करने पर शिष्यों ने भव्य स्वागत किया। उसके बाद नौनाथ आश्रम में सुभाष शास्त्री के नेतृत्व में हजारों शिष्यों ने बैंड-बाजे और फूलों की वर्षा की।
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