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Rajouri News: एसटी छात्रवृत्ति गबन मामले में तत्कालीन निदेशक समेत अन्य अधिकारियों पर केस

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राजोरी। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने एसटी छात्रवृत्ति के गबन मामले में जनजातीय मामले विभाग के अधिकारियों और राजोरी-पुंछ के कंप्यूटर संस्थानों के मालिकों पर केस दर्ज किया है। आरोप है कि अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन कर 2014 से 2018 के दौरान लगभग 1,66,20,000 रुपये छात्रवृत्ति शुल्क इन संस्थानों के बैंक खातों में जमा किया। कंप्यूटर संस्थानों पर रिकॉर्ड में हेरफेर का भी आरोप है।
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एसीबी से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी अधिकारियों में विभाग के तत्कालीन निदेशक मोहम्मद शरीफ चौधरी, तत्कालीन सहायक निदेशक मुजफ्फर हुसैन वानी, गुलजार हुसैन तत्कालीन कनिष्ठ सहायक, जावेद अहमद तत्कालीन प्रभारी कंप्यूटर सहायक, शाहीन नकीशबंदी तत्कालीन मुख्य सहायक शामिल हैं।
आरोपी कंप्यूटर संस्थान मालिकों में मोहम्मद जावेद (मेसर्स नेशनल कंप्यूटर इंस्टीट्यूट सुरनकोट पुंछ, मेसर्स इन्फोटेक इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर, पुंछ), मोहम्मद फारूक (मेसर्स टेक्नो पार्क कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज, राजोेरी ), मोहम्मद शकील (मेसर्स एमएस खान कंप्यूटर इंस्टीट्यूट राजोेरी), मुद्दसिर अहमद (मेसर्स नेसो इंस्टीट्यूट सुरनकोट पुंछ) शामिल हैं।
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एसीबी ने यह मामला मामले की जांच के बाद दर्ज किया है। जांच में पता चला कि जनजातीय मामलों के निदेशालय जेएंडके के आरोपी अधिकारियों ने पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति (एसटी उम्मीदवारों के लिए) को लागू करते समय केंद्र के दिशा निर्देशों का घोर उल्लंघन किया। गैर-मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों आदि के लिए गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों को करोड़ों रुपये जारी किए। प्रति छात्र 18,000 रुपये की छात्रवृत्ति और 2300 रुपये रखरखाव भत्ते के नाम पर गबन किया गया।
पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य पोस्ट मैट्रिक या पोस्ट-माध्यमिक स्तर पर अध्ययन कर रहे अनुसूचित जनजाति के छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना था, ताकि वे अपनी शिक्षा पूरी कर सकें।
जनजातीय मामलों के विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने संस्थानों की वास्तविकता और संस्थानों द्वारा प्रदान किए गए बुनियादी ढांचे व पाठ्यक्रम सामग्री की जांच किए बिना और नियमों का उल्लंघन कर 2014 से 2018 के दौरान लगभग 1,66,20,000 रुपये छात्रवृत्ति शुल्क सीधे संस्थानों के बैंक खातों में वितरित कर दिया।

जांच में पता चला कि मेसर्स नेसो कंप्यूटर इंस्टीट्यूट पुंछ नामक संस्थान के पास एनआईईएलआईटी या अन्य मान्यता प्राप्त निकाय से उचित मान्यता नहीं थी। इसके बावजूद विभाग ने इस संस्थान को भी 33,30,000 रुपये की छात्रवृत्ति शुल्क का भुगतान किया। एनआईईएलआईटी से मान्यता प्राप्त बाकी चार संस्थानों ने एनआईईएलआईटी के माध्यम से उम्मीदवारों की परीक्षा आयोजित नहीं की, बल्कि स्वयं ही पाठ्यक्रम प्रमाण पत्र जारी कर दिए, जिनका कोई मूल्य नहीं था। इससे पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य ही विफल हो गया।
इसके अलावा, एनआईईएलआईटी द्वारा प्रदान की गई सीएचएम “ओ” और “ओ” स्तर की पाठ्यक्रम सामग्री और अवधि संस्थानों द्वारा जारी डिप्लोमा पर प्रदान की गई पाठ्यक्रम सामग्री से भिन्न थी।
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