राजोरी के तिरयाठ में प्रवचान करतीं साध्वी सुमेधा भारती।
राजोरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की तरफ से पांच दिवसीय श्री हरि कथा का आयोजन जिले के मथ्यानी तरियाठ मे किया गया है। कथा के प्रथम दिन की सभा में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सुमेधा भारती ने भक्त ध्रुव के जीवन वृत्तांत को बड़े ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया।
साध्वी ने बताया कि भक्त ध्रुव ने छोटी सी उम्र में ईश्वर प्राप्ति के लिए वन गमन किया। मार्ग में नारद मुनि ने उन्हें ब्रह्म ज्ञान प्रदान किया। इसके पश्चात ध्रुव ने बहुत दिनों तक गहन व कठोर ध्यान साधना की। अंतत: श्री हरि का दर्शन एवं गोद प्राप्त की। ध्रुव ने प्रभु प्राप्ति भी की और सिंहासन प्राप्त किया। यह भक्ति मार्ग का अटल सिद्धांत है। ब्रह्म ज्ञान के लिए पूर्ण सतगुरु की आवश्यकता है। उसके पश्चात निरंतर ध्यान साधना करते हुए भक्ति मार्ग पर अग्रसर रहना अनिवार्य है। तभी मंजिल प्राप्त होगी और जीवन सार्थक होगा। कथा के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। स्वामी हरिदासानंद, स्वामी सुकर्म आनंद आदि विशेष तौर पर मौजूद रहे।