लोगों ने सीएपीडी विभाग के प्रति रोष प्रकट करते हुए कहा कि विभाग का आटा पशुओं को खिलाने लायक भी नहीं है। करीब तीन महीनों से सरकारी राशन की भारी किल्लत से जूझ रहे थन्नामंडी और बुद्धल क्षेत्र के लोगों को मिलावटी आटा दिया जा रहा है। आटे का रंग सफेद नहीं है।
ऐसा लगता है कि उसमें मिट्टी की मिलावट की गई है। थन्नामंडी की महिला मनीजा बेगम, स्थानीय निवासी इकबाल शाल, इमरान अहमद व बुद्धल के रुरिंद्र कुमार, जफर काजी, एजाज अहमद आदि ने बताया कि सरकारी डिपो पर जो आटा उपलब्ध है, उसमें मिलावट साफ नजर आती है।
आटे का रंग खराब होने के अलावा उसमें अजीब सी बू भी है। लोगों ने सीएपीडी विभाग के प्रति रोष प्रकट करते हुए कहा कि यह आटा पशुओं को खिलाने लायक भी नहीं है। ऐसे आटे को खाकर इनसान बीमार पड़ सकता हैं। लोगों ने बताया कि वह अपने बच्चों को भूखे रखना पसंद करेंगे, लेकिन मिलावटी आटा नहीं लेंगे।
रोष प्रकट करते हुए लोगों ने कहा कि पहले ही हमें सरकारी राशन की भारी किल्लत से जूझना पड़ रहा है। उस पर महीनों बाद जो आटा मिला है, वह भी घटिया। इसके अलावा चीनी और केरोसिन उपलब्ध है ही नहीं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही सरकारी डिपो पर साफ आटा नहीं भेजा गया और चीनी व केरोसिन उपलब्ध नहीं करवाया गया तो प्रदर्शन करेंगे।