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प्रोफेसर का छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में आया नया मोड़, पुलिस की जांच जारी

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राजोरी। बाबा गुलाम शाह बादशाह (बीजीएसबी) विश्वविद्यालय की छात्रा के साथ विश्वविद्यालय के ही एक प्रोफेसर पर कथित यौन उत्पीड़न के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। यौन उत्पीड़न के आरोपी प्रोफेसर ने किसी भी छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न से साफ इन्कार किया है।
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उन्होेंने इस मामले को एक सोची समझी साजिश करार दिया है। प्रोफेसर ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उनके खिलाफ विश्वविद्यालय के ही कुछ लोग साजिश रच कर उन्हें बदनाम कर रहे हैं। कुछ वर्ष पहले विश्वविद्यालय में बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले को उजागर करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।

इसके बाद से उनके खिलाफ साजिशें रची जाने लगीं। डीसी के पास भेजी लिखित शिकायत में किसी छात्रा ने अपनी पहचान नहीं बताई है, बल्कि विवि के छात्रों की ओर से शिकायत है। यदि किसी छात्रा के साथ कुछ गलत हुआ है तो वह खुल कर सामने आए व अपने नाम से शिकायत दर्ज करे।
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प्रोफेसर ने कहा कि इससे पहले भी करीब पांच बार उन पर बेबुनियाद आरोप लगाए जा चुके हैं। विवि प्रशासन ने हर बार जांच की और वे बेगुनाह साबित हुए। यदि किसी छात्रा के साथ उन्होंने यौन उत्पीड़न जैसा घिनौना काम किया है तो वह इसे साबित करे।

यदि उनके खिलाफ कुछ साबित हो जाता है तो वह सजा के लिए तैयार हैं। प्रोफेसर ने कहा कि वे गलत नहीं हैं, इसलिए किसी से डरते भी नहीं हैं। इस संदर्भ में जिला मजिस्ट्रेट एवं डीसी डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी का कहना है कि विश्वविद्यालय के कुछ विद्यार्थी उनसे मिलने आए थे।

उनकी पहचान वे सार्वजनिक नहीं कर सकते हैं। पीड़ित छात्रा ने सुबूत के रूप में एक सीडी दी है। सीडी में सामने आया है कि प्रोफेसर छात्राओं को उत्पीड़ित करते हैं। डीएम ने बताया कि ऐसे मामलों में हमें एक लोकल कंपलेंट कमेटी गठित करनी होती है। कुछ औपचारिकताएं पूरी करने के बाद या तो जांच के लिए कमेटी गठित करेंगे या फिर पुलिस को कार्रवाई के लिए लिखेंगे।

डीएम ने दिया सीएम के निर्देश का हवाला
मामले में जांच को लेकर डीएम ने सीएम महबूबा मुफ्ती के निर्देश का हवाला देते हुए बताया कि 18 मई 2016 को राज्य की सीएम ने जिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिए थे कि यौन उत्पीड़न के मामलों की किसी भी शिकायत में कड़ी और त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए। इस मामले में भी इंसाफ होगा।
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