राजोरी। जम्मू-कश्मीर सरपंच पंच डेमोक्र्रेटिक फोरम ने बैक टू विलेज कार्यक्रम के तीसरे चरण का बहिष्कार करने का फैसला किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि सरकार इस कार्यक्रम के तहत लोगों को बेवकूफ बना रही है। क्योंकि सरकार पिछले कार्यक्रमों में हाईलाइट किए गए मुद्दों को निस्तारित करने में विफल रही है।
जम्मू-कश्मीर के सरपंच-पंच डेमोक्रेटिक फोरम के अध्यक्ष मोहम्मद फारूक इंकलाबी ने कहा कि कार्यक्रम में भागीदारी निरर्थक है। पिछले साल के कार्यक्रम में जिन मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है उनको हल नहीं किया गया है। पिछले कार्यक्रम में हमने पंचायतों के लिए विकास योजनाओं के लिए लगातार तीन दिन तक कड़ी मेहनत की, लेकिन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य असफल रहा। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों को जनता को जवाब देना था। पिछले कार्यक्रम की स्थिति के बारे में उन पर भरोसा करने के लिए उनके संबंधित पंचायतों के लोगों को जवाब देना उनके लिए मुश्किल हो गया है।
फोरम के महासचिव शब्बीर अफलातून ने कहा कि इस कार्यक्रम को लाने की सरकार की पहल सराहनीय थी, लेकिन इस कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर लागू करने में विफलता ने इसके उद्देश्य को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले कार्यक्रम के तहत विभिन्न कार्यों के कार्यान्वयन के लिए राजोरी जिले की 312 पंचायतों के लिए 5 करोड़ और प्रत्येक पंचायत को डेढ़ लाख दिए जाने थे, लेकिन आज तक कुछ नहीं मिला ।
फोरम के प्रवक्ता शब्बीर अहमद बडयाल ने कहा कि लोगों की आकांक्षाएं हमारे साथ बहुत अधिक हैं, लेकिन जब सरकार द्वारा बुनियादी मांगों को अनदेखा किया जाता है, तो लोगों का सिस्टम पर भरोसा नहीं रहता है। हमने इस कार्यक्रम के तीसरे चरण में भाग नहीं लेने का फैसला किया है। क्योंकि यह कार्यक्त्रस्म न केवल समय की बर्बादी है, बल्कि सार्वजनिक धन की बर्बादी भी है।
उन्होंने आगे कहा कि अगर 2 अक्टूबर से पहले विकास कार्यों के लिए पंचायतों के बैंक खातों में धनराशि आ जाती है, तो वे तीसरे चरण के ग्राम कार्यक्त्रस्म में वापस भाग लेने के अपने फैसले पर विचार करेंगे।
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