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Rajouri News: सीमा क्षेत्र में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए सेना अलर्ट

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भारतीय सेना की 25 इन्फैंट्री डिवीजन की ओर से जीएमसी राजोेरी में सीएमई आयोजित
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आपातकालीन चिकित्सा और बदलते प्रतिमान विषय पर सेना वरिष्ठ अफसरों ने रखे विचार


संवाद न्यूज एजेंसी


राजोेरी। सीमा एवं संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा आपात स्थितियों से निपटने के लिए तैयारियों को मजबूत करने, त्वरित चिकित्सकीय प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने तथा विभिन्न स्वास्थ्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय विकसित करने के लिए भारतीय सेना की 25 इन्फैंट्री डिवीजन की ओर से जीएमसी राजोरी में सीएमई का आयोजन किया गया।
इसमें सेना, बीएसएफ और नागरिक स्वास्थ्य संस्थानों के चिकित्सा विशेषज्ञों ने हिस्सा लेकर अपने चिकित्सकीय अनुभव, परिचालन ज्ञान और आपातकालीन चिकित्सा से जुड़ी बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा किया।
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सरकारी मेडिकल कॉलेज में बुधवार को मेहरा कैंपस में भारतीय सेना की 25 इन्फैंट्री डिवीजन, ऐस ऑफ स्पेड्स डिवीजन के सहयोग से सक्रिय सीमा क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा व बदलते प्रतिमान विषय पर कंटिन्यू मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) में 25 इन्फैंट्री डिवीजन के डिप्टी जीओसी ब्रिगेडियर अजीश जोसेफ, मुख्यालय 16 कोर के ब्रिगेडियर मेडिकल ब्रिगेडियर प्रसाद आर लेले, 150 जनरल अस्पताल राजोेरी की ब्रिगेडियर पूनम राज, बीएसएफ जम्मू फ्रंटियर मुख्यालय के डीआईजी (मेडिकल) डॉ सुखजिंदर सिंह, 25 इन्फैंट्री डिवीजन के कर्नल मेडिकल कर्नल अशोक कुमार, कर्नल विनॉय कुमार, जम्मू-कश्मीर के न्यू मेडिकल कॉलेजों के डायरेक्टर कोऑर्डिनेशन डॉ मुश्ताक अहमद राथर, श्री माता वैष्णो देवी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल कटरा के निदेशक डॉ यशपाल शर्मा तथा जीएमसी जम्मू की प्रोफेसर ऑफ माइक्रोबायोलॉजी डॉ हरलीन कौर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ मौजूद रहे।
स्वास्थ्य संस्थानों के बीच समन्वय होना महत्वपूर्ण
जीएमसी के प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ. एएस भाटिया ने सीमा क्षेत्रों में सेना, अर्धसैनिक बलों तथा नागरिक स्वास्थ्य संस्थानों के बीच समन्वय एवं सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। चर्चा के दौरान सीमा क्षेत्रों में मजबूत एवं लचीली स्वास्थ्य व्यवस्था, आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित चिकित्सा प्रतिक्रिया, बड़े पैमाने पर हताहत होने की स्थिति तथा संघर्ष से संबंधित घटनाओं के दौरान विभिन्न स्वास्थ्य एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों को चुनौतीपूर्ण परिचालन परिस्थितियों में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने से जुड़े अनुभव साझा करने का अवसर भी मिला।
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पीर पांजाल क्षेत्र के लिए सीएमई महत्वपूर्ण
पीर पंजाल क्षेत्र के लिए यह पहल विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि नियंत्रण रेखा (एलओसी) के निकटता और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां के स्वास्थ्य संस्थानों को विभिन्न प्रकार की आपात स्थितियों से निपटना पड़ सकता है। सीएमई ने सीमा क्षेत्रों में समय पर और प्रभावी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए एकीकृत चिकित्सा तैयारियों तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र की आवश्यकता को रेखांकित किया।
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