सुरक्षाबलों और खुफिया एजेंसियों के लिए चिंता बनीं पुंछ क्षेत्र में आतंकी घटनाएं
अब तक हुए हर हमले को शाम तीन से पांच बजे के बीच दिया गया है अंजाम
संवाद न्यूज एजेंसी
पुंछ। जिले में पिछले दो साल से बढ़ रही आतंकी घंटनाएं जहां सुरक्षाबलों आैर खुफिया एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। वहीं, जिले में अभी तक नापाक आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने वाले आतंकियों का किसी भी घटना के बाद कोई पता तक नहीं चल रहा है।
सेना पर हमलों को अंजाम देने वाले आतंकी अज्ञात ही बने हुए हैं। जिले में पिछले कुछ समय से होने वाले आतंकी हमलों के तौर तरीकों को देखा जाए तो एक तो आतंकियों की आेर से हर हमला बड़ी सोच समझ और योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जाता है। इसमें अभी तक हुए हर हमले को शाम तीन से पांच बजे के बीच अंजाम दिया गया है, ताकि हमले कुछ ही घंटों बाद अंधेरा हो जाए और आतंकी अंधेरे का लाभ उठाकर बचकर भाग निकलते हैं। साथ ही अब तक जितने भी आतंकी हमलों को अंजाम दिया गया है वह आतंकवाद के गढ़ रहे क्षेत्रों के काफी करीब या आसपास का स्थान ही देखने को मिला है। अगर चमरेड में सेना पर हुए आतंकी हमले की बात करें तो उसके आसपास मस्तानदरा, सावनी और चमरेड आतंकवाद में आतंकियों का गढ़ रहे हैं। भाटादूडियां में सेना पर हुए दो हमलों की बात करें तो भाटादूडियां, संगयोट और नक्कामंजयाडी आतंकियों का गढ़ रह चुके हैं। देहरागली आतंकी हमले की बात करें तो आतंकवाद के दौर में उसके करीब टोपापीर,र मुगलमाडा और मस्तानदरा आतंकियों का गढ़ रहे हंै और आज हुए आतंकी हमले के स्थान की बात करें तो गुरसाई, गुरसाई मूरी और घंटना स्थल के नीचे स्थित सनेई टाप आतंवाद के दौर में आतंकियों का गढ़ रहे हैं। इससे इस बात का भी संकेत मिल रहा है कि आतंकियों के पुराने गढ़ एक बार फिर आतंकियों के लिए स्वर्ग बनते जा रहे हैं। जहां आतंकी अपनी नापाक हरकतों को अंजाम देकर बच निकलते हैं।