ज्ञान गंगा मठ में चतुर्मास्य के अवसर पर महामंडलेश्वर 1008 स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती महाराज ने संगत को दिया ज्ञान
संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरबनी। भगवान शिव का अभिषेक करने से शत्रुओं का नाश होता है। इन शत्रुओं में अर्थ काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि शामिल हैं। यह प्रवचन ज्ञान गंगा मठ में चतुर्मास्य के अवसर पर महामंडलेश्वर 1008 स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती महाराज ने श्रद्धालुओं को दिए। इस मौके पर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
प्रवचनों के बाद शाम साढ़े सात से आठ बजे तक ज्ञान गंगा मठ के मुख्य पंडाल में षोडशोपचार शिवपूजन का विशाल कार्यक्रम हुआ। इसमें श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के जयकारे लगाए, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया गया। इस दौरान भगवान शिव के कई स्तोत्रों का पाठ भी किया। कार्यक्रम के अंत में शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ किया गया, जिसके बाद भगवान शिव की आरती के साथ ही पुष्पांजलि हुई और भक्तों में प्रसाद वितरित किया गया।
प्रवचन के दौरान महाराज ने कहा कि बाहरी एवं मानसिक समस्या से निजात प्राप्त करने के लिए भांग के रस से और सुख-समृद्धि के लिए दूध से अभिषेक करना चाहिए। आरोग्य की इच्छा करने वाले लोग भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें। उन्होंने कहा कि सृष्टि में शिव तत्व से बाहर कुछ भी नहीं है। सारी सृष्टि शिवमय है। शिव ही सृष्टि के भीतर और बाहर हैं। शिव की इच्छा से ही सृष्टि की उत्पत्ति एवं पालन होता है। शिव ही अपनी इच्छा से सृष्टि का संहार करके इसे अपने में लीन कर लेते हैं। इसलिए अकाल मृत्यु को टालने के लिए जीवन में संपूर्ण रोगों का नाश करने के लिए एवं समृद्धि, सुख-शांति व पापनाश के लिए भगवान शिव की उपासना अवश्य करनी चाहिए।
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फोटो: ज्ञान गंगा मठ में भगवान शिव का विशेष पूजन करते हुए राजगुरु महामंडलेश्वर स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती।
फोटो कैप्शन : ज्ञान गंगा मठ में भगवान शिव का विशेष पूजन के दौरान मौजूद श्रद्धालु।