यातायात पुलिस के कडे़ प्रयासों के बाद भी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में ओवरलोडिंग जारी है। जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में वाहनों के पीछे लटक कर या छतों पर सवार होकर विद्यार्थी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं।
ऐसे में हर समय हादसों की आशंका बनी रहती है। वहीं प्रशासन कहीं पर भी ऐसे वाहन चालकों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में ओवरलोडिंग का यह आलम है कि आटो जिसकी क्षमता सात सवारियों की है, उसके भीतर 14 सवारियां ठूंस-ठूंस कर भरी रहती हैं।
उसके साथ ही 10-12 सवारियां आटो के पीछे लटक कर यात्रा करती हैं। इसमें अधिकतर स्कूली छात्र होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में वाहनों के पीछे लटक कर यात्रा करने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि उनके गांव से गुजरने वाले बडे़ वाहन उनके लिए बीच रास्ते में रुकते नहीं हैं।
ऐसे में लोकल चलने वाले छोटे वाहन आटो अथवा मेटाडोरों में अधिक सवारियां होने के कारण उनको वाहन के पीछे लटककर स्कूल आना-जाना पड़ता है। वहीं वीरवार को थाना प्रभारी जतिन्दर रैना के नेतृत्व में नगर में नाखांवाले चौराहे, शंकरनगर चौक, बस अड्डे आदि स्थानों पर विशेष नाके लगाए गए।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 19 दोपहिया वाहनों को सीज कर थाने पहुंचाया गया, जबकि तीन दर्जन से अधिक वाहनों के चालान काटे। पुलिस के इस अभियान का पता चलते ही वाहन चालकों में मानो हड़कंप मच गया। जिसके चलते बड़ी संख्या में मोटर साइकिल, स्कूटर वाले युवा गलियों में भाग खडे़ हुए।