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दशनामी अखाड़ा से निकाली गई श्री बूढ़ा अमरनाथ छड़ी यात्रा

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श्री बूढ़ा अमरनाथ यात्रा के लिए छड़ी पूजन करते महंत। संवाद - फोटो : RAJOURI
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पुंछ। नगर स्थित राज गुरु गद्दी श्री दशनामी अखाड़ा मंदिर से शनिवार को पूजा के बाद श्री बूढ़ा अमर नाथ जी की देवी पार्वती और भगवान शंकर के स्वरूप पवित्र चांदी की छड़ी मुबारक यात्रा निकाली गई। इसमें राज गुरु गद्दी के महंत 1008 महामंडलेश्वर राजगुरु स्वामी विश्वात्मा नंद सरस्वती मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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शनिवार तड़के वैदिक मंत्रों के साथ पूजा के बाद जब छड़ी मुबारक श्री दशनामी अखाड़ा मंदिर के बाहर लाई गई, तो वहां पर जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों ने छड़ी मुबारक को सलामी दी। इसके बाद वाहन के जरिये छड़ी मुबारक श्री बूढ़ा अमरनाथ के लिए रवाना हुई। करीब एक घंटे के बाद पवित्र छड़ी मुबारक यात्रा मंडी तहसील मुख्यालय स्थित भगवान भोले नाथ के प्राचीन धाम श्री बूढ़ा अमरनाथ मंदिर के बाहर पहुंची। यहां भी पुलिस की तरफ से छड़ी मुबारक को सलामी दी गई। इसके बाद वैदिक मंत्रों के बीच छड़ी मुबारक का पूजन करते हुए भगवान भोलेनाथ के स्वयंभू शिवलिंग पर स्थापित कर दिया गया। यहां अगले तीन दिनों तक छड़ी और भगवान भोलेनाथ के स्वयंभू शिवलिंग का दर्शन पूजन होगा।
घर में रहकर ही भगवान का ध्यान करें : स्वामी जी
स्वामी विश्वात्मा नंद सरस्वती ने कहा कि कोरोना महामारी को देखते हुए प्रशासन एवं सरकार की तरफ से दिए गए निर्देश का पालन करते हुए इस बार छड़ी मुबारक को शनिवार तड़के मंदिर में लाया गया, ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ एकत्रित न हो। क्योंकि अगर एक भी व्यक्ति संक्रमित होगा तो वह सैकड़ों को संक्रमित कर देगा। वैसे भी शास्त्र इस बात की आज्ञा देते हैं कि देश काल और परिस्थितियों के अनुसार ही धार्मिक आयोजन किए जाएं। उसी को देखते हुए छड़ी यात्रा धूमधाम से नहीं निकाली गई। अगले दो तीन दिनों भी सभी श्रद्धालुओं से आग्रह है कि वह घर में ही भगवान का ध्यान और पूजन करें। यहां मंदिर में भीड़ करने का प्रयास नहीं करें।
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गौरतलब है कि परंपरा के अनुसार हर वर्ष रक्षाबंधन के दो दिन पूर्व पवित्र छड़ी यात्रा का आयोजन किया जाता है। इसमें देश भर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए श्रद्धालुओं को इससे दूर रखने के लिए तड़के छड़ी यात्रा निकाली गई।
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